दीपक श्रीवास्तव
लक्ष्मण शक्ति से भावुक हुए दर्शक,संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान तो गूंजे जय श्रीराम के जयकारे
जौनपुर। हुसेनाबाद में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला में अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति और उसके निवारण के प्रसंगों का भावपूर्ण एवं सजीव मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत कर दिया। अंगद और रावण के बीच तीखे संवादों ने जहां दर्शकों में उत्सुकता पैदा की, वहीं युद्ध के दौरान लक्ष्मण के मूर्छित होने और उनके उपचार के लिए हनुमान के संजीवनी बूटी लाने के दृश्य ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। मंचन के दौरान पंडाल में जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
रामलीला के दौरान लंका में श्रीराम के दूत बनकर पहुंचे अंगद और रावण के बीच संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। अंगद ने रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक श्रीराम को लौटाने और युद्ध का रास्ता छोड़ने की सलाह दी। उन्होंने रावण को उसकी शक्ति और अहंकार के परिणामों से आगाह करते हुए प्रभु श्रीराम की शक्ति का एहसास कराया। दूसरी ओर, रावण अपने अहंकार में चूर होकर अंगद की बात मानने को तैयार नहीं हुआ। दोनों के बीच हुए संवाद ने दर्शकों को रामायण के उस प्रसंग की याद दिलाई, जिसमें सत्य और धर्म के पक्ष में खड़े अंगद ने रावण की सभा में निर्भीकता का परिचय दिया था।
इसके बाद राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण शक्ति प्रसंग का मंचन हुआ। युद्ध में मेघनाद की शक्ति लगने से लक्ष्मण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े। लक्ष्मण की यह दशा देखकर श्रीराम व्याकुल हो उठे। भाई के प्रति उनका प्रेम और चिंता देखकर दर्शक भावुक हो गए। लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए लंका से वैद्य सुषेण को लाने और उनके परामर्श पर संजीवनी बूटी की व्यवस्था करने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
लक्ष्मण के उपचार के लिए हनुमान के संजीवनी बूटी लाने का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा। हनुमान के पराक्रम, समर्पण और सेवाभाव को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। संजीवनी मिलने के बाद लक्ष्मण के स्वस्थ होने पर रामलीला स्थल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कलाकारों के अभिनय, संवाद अदायगी और प्रसंगों की प्रस्तुति ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।
राम की भूमिका दीपक श्रीवास्तव, लक्ष्मण की शिवा श्रीवास्तव, अंगद की गुंजन श्रीवास्तव, राजकुमार की अरविंद मिश्रा, रावण की अभिनव मिश्रा, हनुमान की मोलू सोनकर, विभीषण की अंकित रावत तथा सुषेण वैद्य की भूमिका चंदन गौड़ ने निभाई। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से रामलीला के प्रसंगों को प्रभावशाली बनाया।
हुसेनाबाद की रामलीला की परंपरा वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। स्थानीय कलाकारों द्वारा रामायण के प्रसंगों का मंचन नई पीढ़ी को मर्यादा, त्याग, भक्ति, भाईचारे और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है
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