दीपक श्रीवास्तव
कटनी की नगर पुलिस अधीक्षक रहीं नेहा पच्चीसिया ने वर्दी को पहली बार नहीं किया दागदार, एयर होस्टेस से सीएसपी तक का सफर
कटनी। मूल रूप से राजगढ़ जिले के पचोर तहसील की निवासी निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) नेहा पच्चीसिया के पिता शिक्षक थे। मिडिल क्लास परिवार से संबंध रखने वाली नेहा प्रारंभिक शिक्षा राजगढ़ में लेने के बाद एविएशन में डिप्लोमा कर वे एयर इंडिया में एयर होस्टेस बनी थीं। वर्ष 2012 से 2015 तक एमपीपीएससी की तैयारी की और 2016 में आए परिणाम में प्रदेश में 20वीं रैंक हासिल कर सीएसपी बनीं।
एयर होस्टेस से सीएसपी तक का सफर
सीएसपी बनने से पहले कुछ दिनों तक महिला एवं बाल विकास विभाग में भी सेवाएं दीं। पहली पोस्टिंग गुना जिले में हुई थी, जहां पर भी आईजी से विवाद के चलते उनका स्थानांतरण हुआ था। कोरोना काल में देश भक्ति गीतों में डांस कर लोगों को मोटिवेट करने पर उनको सम्मान भी मिला था। उसके बाद पीएचक्यू और खंडवा में तैनात रहीं। वर्ष 2025 में उनको स्थानांतरित कर कटनी सीएसपी बनाया गया था।
देश भर में चर्चा में रहा है सीएसपी पद
कटनी का सीएसपी का पद लंबे समय से देशभर चर्चा में रहा है। नेहा पच्चीसिया से पहले ख्याति मिश्रा सीएसपी रही हैं और पुलिस अधीक्षक अभिजीत रंजन से उनकी करीबी व पति से विवाद के बाद सीएसपी बंगले में ही उनके पूरे परिवार के साथ पुलिस ने मारपीट की थी। एसपी का तबादला व विभागीय जांच के साथ ही सीएसपी को हटाया गया था। उनके बाद अब नेहा पच्चीसिया भी सीएसपी की कुर्सी में बैठने के साथ ही पूरे देश भर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी हुई
हत्या की जांच व जमीन खरीदी के दौरान सहयोग करने पर एसआइ सौरभ सोनी, रीडर नरेन्द्र पांडे, आरक्षक मट्टू व चालक केशव सिंह को निलंबित किया जा चुका है। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और जांच में जिले के अन्य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी भी उसकी जद में आ सकते हैं। जिसको लेकर महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
बंगले में दो दिन रखा, सरकारी गाड़ी से रजिस्ट्री
आइजी जबलपुर की कराई गई जांच में सामने आया है कि सीएसपी ने पीड़ित रमेश लोधी (निवासी कन्हवारा) को रंगनाथ नगर थाना में रखने के साथ ही दो दिन तक अपने शासकीय आवास में बंधक बनाकर रखा। रजिस्ट्री वाले दिन पीड़ित भाग न जाए या किसी से शिकायत न कर दे, इसको लेकर उसे अपनी सरकारी गाड़ी में बैठाकर रजिस्ट्री कार्यालय ले जाया गया था।
धमकी दी कि जेल से बचना है, तो 75 लाख और देने होंगे
जमीन गंवाने के बाद जब पीड़ित ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की और पटवारी के पास नामांतरण रोकने का आवेदन दिया, तो सीएसपी ने रमेश पर दर्ज एक हत्या के केस का फायदा उठाते हुए धमकी दी कि यदि वह जेल से बचना चाहता है, तो उसे 75 लाख रुपये और देने होंगे। सीएसपी ने दावा किया था कि रकम मिलने पर वह कोर्ट में बयान बदलवाकर उसे बरी करवा देंगी। पैसे देने से इनकार करने पर सीएसपी ने रमेश और उसके दामाद को मुकदमे में शामिल कर जेल भिजवा दिया।