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मानीकला रामलीला समिति ने भाजपा नेता कृष्ण कुमार जायसवाल को किया सम्मानित

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दीपक श्रीवास्तव 
मानीकला रामलीला समिति ने भाजपा नेता कृष्ण कुमार जायसवाल को किया सम्मानित 
राम के चरित्र से मिलती है 
 त्याग और समर्पण की प्रेरणा - इंजी कृष्ण कुमार जायसवाल

जौनपुर। मानीकला के पक्का पोखरा पर परम्परागत विजय दशमी मेले के मुख्य अतिथि इंजी कृष्ण कुमार जायसवाल मुन्नू ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान के चरित्र से हमें त्याग और समर्पण की प्रेरणा मिलती है। भगवान राम के आदर्शों पर चलकर ही राम राज्य की कल्पना की जा सकती है। 
मानीकला में विशाल पोखरे के एक तरफ ऊंचाई पर जहां भगवान राम माता सीता ,लक्ष्मण एवं वीर हनुमान जी के साथ विराजते हैं तो पोखरे के दूसरे तरफ रावण का विशाल पुतला स्थापित रहता है l पोखरे पर ही विशाल क्षेत्र पर तरह-तरह की दुकाने सजती हैं l 
   कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता इंजी. कृष्ण कुमार जायसवाल "मुन्नू"
द्वारा भगवान राम, लक्ष्मण , सीता एवं हनुमान जी को माल्यार्पण कर आशिर्वाद प्राप्त किया।  इस मौके पर रामलीला समिति के पदाधिकारियों द्वारा श्री मुन्नू का जोरदार स्वागत किया गया l स्वागत करने वालों में अध्यक्ष राम किसुन सोनकर ,उपाध्यक्ष संतोष सेठ, कोषाध्यक्ष  मनोज चौरसिया ,सुनील साहू, आदेश कश्यप, अशोक बेंनवंशी ,ज्ञान प्रकाश साहू, रमेश जायसवाल, शिवम जायसवाल, संदीप बिन्द ,फागुलाल चौरसिया, आनंद गुप्ता एवं संरक्षक  राजेश अग्रहरि प्रमुख  रहे l अंत मे मुख्य अतिथि श्री जायसवाल ने समिति के अध्यक्ष राम किसुन सोनकर का माल्यार्पण कर सम्मानित किया।
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कुश्ती में जौनपुर की बेटी आस्था आनंद सिंह ने स्टेट चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक

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दीपक श्रीवास्तव 
कुश्ती में जौनपुर की बेटी आस्था आनंद सिंह ने स्टेट चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक 

जौनपुर। गोरखपुर में आयोजित उत्तर प्रदेश सीनियर स्टेट चैंपियनशिप 2026 कुश्ती प्रतियोगिता में 65 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिभाग करते हुए जौनपुर की बेटी आस्था आनंद सिंह ने गोल्ड मेडल जीत लिया।आस्था आनंद सिंह गोल्ड मेडल प्राप्त कर उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने जा रही है ।  आस्था के गोल्ड मेडल मिलने पर जौनपुर में जश्न का माहौल रहा। आस्था के पिता आनंद सिंह पुलिस विभाग में कार्यरत हैं वहीं मां मेनका सिंह भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं। बेटी आस्था की सफलता पर शुभ चिंतकों ने घर पहुंच कर बधाई दी और बेटी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आस्था ने पहली बार सीनियर स्टेट चैंपियन शिप में प्रतिभाग कर यह सफलता अर्जित की।
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जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व : पं. रजनीकांत द्विवेदी

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दीपक श्रीवास्तव 
जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व : पं. रजनीकांत द्विवेदी
श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन हनुमान महिमा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और पुतना प्रसंग का हुआ वर्णन

जौनपुर। नगर के विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने हनुमान महिमा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और पुतना वध के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सत्संग का प्रभाव इतना गहरा होता है कि मनुष्य का पूरा जीवन बदल सकता है। सत्संग के सामने संसार के सुख और वैभव का कोई विशेष महत्व नहीं है। मनुष्य के जीवन की वास्तविक सार्थकता परमात्मा के भजन, संकीर्तन और उनकी कथा के श्रवण में है। हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने बताया कि प्रभु श्रीराम की कथा के प्रति उनकी भक्ति और समर्पण अद्वितीय था। उन्होंने प्रसंग सुनाया कि जब प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी से अपने साथ चलने के लिए कहा, तो हनुमान जी ने पूछा कि क्या वहां भी प्रभु की कथा सुनने को मिलेगी। जब उन्हें बताया गया कि कथा का श्रवण धरती पर ही संभव होगा, तो उन्होंने साकेत धाम जाने के बजाय यहीं रहने का निर्णय लिया। पं. द्विवेदी ने कहा कि हनुमान जी भगवान श्रीराम की कथा में इतने लीन रहते थे कि उनके लिए कथा श्रवण ही सबसे बड़ा सुख था। उन्होंने सच्चे सेवक के रूप में प्रभु की सेवा की और अपने आचरण से समर्पण, निष्ठा तथा भक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया। मनुष्य को हनुमान जी के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा के भजन और संकीर्तन से दूर रहता है, वह अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अवसर से वंचित रह जाता है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए कथाव्यास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से नंद बाबा और माता यशोदा के घर आनंद छा गया। नंद बाबा ने 108 ब्राह्मणों को आमंत्रित कर अपने घर में पाठ कराया। भगवान के जन्म की खुशी में उन्होंने खुले मन से दान-पुण्य किया। जो भी उनके घर पहुंचा, उसे वस्त्र और आभूषण भेंट किए गए। उन्होंने सवा लाख गायों का गोदान कराया। कथाव्यास ने कहा कि नंद बाबा का आनंद और उत्साह देखते ही बनता था। भगवान श्रीकृष्ण का पालन-पोषण करने का सौभाग्य माता यशोदा को मिला, जो उनके पुण्य प्रताप का फल था। उन्होंने ब्रजमंडल की महिमा बताते हुए कहा कि ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा का धार्मिक महत्व है। श्रद्धा और विश्वास के साथ ब्रज की परिक्रमा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि कंस को जब यह सूचना मिली कि जिस बालक से उसे भय था, उसका जन्म हो चुका है, तो वह चिंतित हो उठा। कंस ने उस बालक को मारने के लिए अनेक प्रयास किए और इसी क्रम में पुतना को भेजा।
पुतना के प्रसंग का वर्णन करते हुए पं. रजनीकांत द्विवेदी ने बताया कि पुतना ने कंस को आश्वासन दिया था कि वह उसकी मनोकामना पूरी कर देगी। इसके लिए उसने अपना स्वरूप बदलने की बात कही। कथा के अनुसार, पुतना ब्रज पहुंची और अनेक शिशुओं को मारने के बाद महल में प्रवेश किया। उसने अपने स्तनों पर विष का लेप किया और भगवान श्रीकृष्ण को अपने पास लेकर उन्हें विषपान कराने का प्रयास किया।
इस प्रसंग की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कथाव्यास ने कहा कि पुतना का अर्थ अविद्या है। जहां अविद्या का वास होता है, वहां विवेक का अभाव मनुष्य को संकट में डाल सकता है। इसलिए जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व है। मनुष्य को सही और गलत के बीच अंतर समझते हुए अपने जीवन में सदाचार और भक्ति को स्थान देना चाहिए। कथा के दौरान श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और अन्य प्रसंगों को सुनकर भावविभोर हुए। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की मुख्य यजमान श्रीमती विमला सेठ हैं। इस अवसर पर मनोज पाण्डेय, राकेश कुमार सिंह, सोनी, सुनील मिश्र, आचार्य सूरत तिवारी, संतोष कुमार जी, नीलम, किरण सेठ, रेखा सेठ, बबली सेठ, अर्चना, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ समेत गठना कोठी परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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रघुकुल की रीति निभाने के लिए वन गए भगवान श्रीराम : आचार्य शांतनु जी महाराज

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दीपक श्रीवास्तव 

रघुकुल की रीति निभाने के लिए वन गए भगवान श्रीराम : आचार्य शांतनु जी महाराज


श्रीरामकथा के सातवें दिन वनगमन यात्रा और राजा दशरथ के महाप्रयाण का मार्मिक वर्णन


हनुमान चालीसा के पाठ से मिलता है भक्ति और विश्वास का बल


भक्ति के नाम पर अश्लीलता परोसना अनुचित : आचार्य शांतनु जी महाराज


प्रमुख देवस्थानों के महंतों एवं धर्माचार्यों का मंच से हुआ सम्मान


जौनपुर। नगर के बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में वरिष्ठ भाजपा नेता ज्ञान प्रकाश सिंह द्वारा आयोजित नौ दिवसीय श्रीरामकथा के सातवें दिन कथाव्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने भगवान श्रीराम की वनगमन यात्रा, केवट प्रसंग, गुरु के मार्गदर्शन की महत्ता और राजा दशरथ के महाप्रयाण का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति, त्याग और समर्पण के प्रसंगों को सुनकर भावविभोर हो उठे।


आचार्य शांतनु जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने पिता के वचन और रघुकुल की मर्यादा निभाने के लिए राजमहल के सुखों का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। माता सीता और लक्ष्मण जी का उनके साथ वन जाना प्रेम, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा की अनुपम मिसाल है। उन्होंने प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज से श्रीराम की भेंट का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जीवन में सही मार्ग चुनने के लिए गुरु और अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन आवश्यक है।


केवट प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज जी ने कहा कि सच्ची भक्ति स्वार्थ से नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम और सेवा से प्रकट होती है। केवट ने भगवान श्रीराम से किसी प्रकार का पारिश्रमिक नहीं मांगा, उसके लिए प्रभु की सेवा ही सबसे बड़ा धन थी। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करने का आग्रह करते हुए कहा कि हनुमान जी का जीवन भक्ति, साहस, विश्वास और समर्पण की प्रेरणा देता है।


राजा दशरथ के महाप्रयाण का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य शांतनु जी महाराज भावुक हो उठे। भगवान श्रीराम के वियोग में राजा दशरथ की व्यथा ने श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन माता-पिता के सम्मान, पारिवारिक संस्कारों और विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की शिक्षा देता है।


धार्मिक आयोजनों की गरिमा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति के नाम पर अश्लीलता परोसना अनुचित है। भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिकता, सदाचार और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान बढ़ाना होना चाहिए।

कथा का विशेष आकर्षण जनपद के प्रमुख देवस्थानों के महंतों, पीठाधीश्वरों, पुरोहितों एवं धर्माचार्यों का मंच से सम्मान रहा। मुख्य आयोजक ज्ञान प्रकाश सिंह ने संत-महात्माओं का सम्मान कर सनातन संस्कृति और जनपद की धार्मिक परंपराओं के प्रति आदर व्यक्त किया। भव्य पंडाल और श्रद्धालुओं के लिए की गई सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं के बीच आचार्य शांतनु जी महाराज की अमृतमयी वाणी से पूरा वातावरण राममय हो उठा।


इस अवसर पर अंगराज जी (मा. प्रान्त संघचालक), कुंवर बृजेश सिंह (राज्यमंत्री, लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार), प्रो. बिहारी लाल शर्मा (कुलपति, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय), राकेश सिंह (विधायक, गौरीगंज, अमेठी), डॉ. सुजीत सिंह (पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष), रजत जी (जिला प्रचारक, मीरजापुर), डॉ. उमेश चन्द्र तिवारी, विनय शाही जी, श्रीमती कमला सिंह, डॉ. सत्यप्रकाश सिंह, डॉ. समर बहादुर सिंह, डॉ. अरुण मिश्रा, निखिलेश सिंह, सतीश सिंह ‘गुड्डू’, भूपेश कुमार सिंह, विमल कुमार गौतम, शैलेश कुमार सिंह, जितेंद्र कुमार मिश्रा, नरेंद्र विश्वकर्मा, बटेश्वर सिंह, के.के. विश्वकर्मा, अमित सिंह, जज सिंह ‘अन्ना’, राम सिंह राव, श्री महंत नरसिंह दास जी महाराज, डॉ. रजनीकांत द्विवेदी, महंत बाबा रामदास जी महाराज, मुक्तेश्वर पंडा, महंत राजन दास जी, रमेश मिश्रा, पं. रविन्द्र द्विवेदी जी एवं पीठाधीश्वर महंत रामदास जी महाराज सहित जनपद के विभिन्न मंदिरों के महंत, पुरोहित, संत-महात्मा और अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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सैफई में अब नहीं हो रहा नाच, सपाई AI से अखिलेश को नचा रहे : ओमप्रकाश राजभर

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दीपक श्रीवास्तव 

सैफई में अब नहीं हो रहा नाच, सपाई AI से अखिलेश को नचा रहे : ओमप्रकाश राजभर

रामकथा में पहुंचे सुभासपा अध्यक्ष ने विपक्ष पर साधा निशाना, बोले- मोदी और योगी के नेतृत्व में हो रहा विकास

जौनपुर, 26 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठवें दिन सोमवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर पहुंचे। उन्होंने रामकथा को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए भगवान श्रीराम के जीवन से भाईचारे, एकता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की सीख लेने की अपील की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयानों पर पलटवार करते हुए विपक्ष को निशाने पर लिया।

पत्रकारों से बातचीत में राजभर ने कहा कि भगवान श्रीराम ने धरती पर जन्म लेकर अत्याचारियों का विनाश किया और समाज को अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संदेश दिया। भगवान श्रीराम ने वानर और भालुओं को साथ लेकर लंका पर विजय प्राप्त की। समुद्र पर सेतु निर्माण में नल और नील जैसे योद्धाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि रामकथा से प्रेरणा लेकर लोगों को आपसी द्वेष भुलाकर भाईचारे के साथ रहना चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने उसे हताशा और निराशा से भरा बताया। उन्होंने कहा कि वह इस बयान की निंदा करते हैं और खरगे को पूरे देश के सामने माफी मांगनी चाहिए।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के वोट चोरी के आरोपों पर राजभर ने कहा कि यदि चुनाव में धांधली हुई है तो सपा के जीते हुए सांसद और विधायक इस्तीफा दें, तभी उनकी बात को गंभीरता से लिया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। विपक्ष के नेता शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास जैसे विषयों पर चर्चा करने के बजाय बेवजह के विवाद खड़े करते हैं।

राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने सेना को खुली छूट दी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निर्माण और अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण को विकास की उपलब्धियां बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है। सपा सरकार के दौरान दंगे, कर्फ्यू और गैंगवार जैसी घटनाएं होती थीं, जबकि योगी सरकार ने इन पर अंकुश लगाया है।

सपा पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा, “अब तो सैफई में नाच भी नहीं हो रहा है, सपाई खुद एआई से अखिलेश यादव को नचा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नेताओं के एक दल से दूसरे दल में आने-जाने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता। जनता का समर्थन महत्वपूर्ण है और आम जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ है।


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रामकथा से पूरा जौनपुर राममय हुआ, प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे : रविंद्र जायसवाल

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दीपक श्रीवास्तव 
रामकथा से पूरा जौनपुर राममय हुआ, प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे : रविंद्र जायसवाल
खड़गे की टिप्पणी पर बोले मंत्री- राम विरोधी रावण और राक्षस के समान 

जौनपुर, 27 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के जौनपुर में बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित नौ दिवसीय श्रीरामकथा में शामिल होने मंगलवार को पहुंचे स्टांप एवं पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री रविंद्र कुमार जायसवाल ने हिंदुस्थान समाचार प्रतिनिधि से बातचीत करते हुए 
कहा कि आचार्य शांतनु जी महाराज की कथा से पूरा जौनपुर राममय हो गया है। हम सभी का प्रयास होना चाहिए कि भगवान श्रीराम के बताए मार्गों को अपने जीवन में उतारें। प्रभु श्रीराम ही सबका कल्याण करेंगे।

मंत्री ने कहा कि जौनपुर ऐतिहासिक शहर है, जहां ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में श्रीरामकथा का आयोजन किया जा रहा है। आचार्य शांतनु जी महाराज के मुखारविंद से हो रही कथा लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों और उनके जीवन मूल्यों से जोड़ रही है। हम सभी को प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलने का प्रयास करना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी के संबंध में मंत्री रविंद्र कुमार जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो भगवान श्रीराम का विरोधी है, वह रावण और राक्षस के समान है। खड़गे की शक्ल रावण जैसी बताते हुए उन्होंने उनके वक्तव्य और भाषण को भी रावण जैसा करार दिया।
वहीं, विधान परिषद की 11 सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर मंत्री ने दावा किया कि पूरे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सभी 11 सीटों पर जीत हासिल करेगी।


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राम-केवट संवाद सुन भाव-विभोर हुए दर्शक, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा पंडाल

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दीपक श्रीवास्तव 

राम-केवट संवाद सुन भाव-विभोर हुए दर्शक, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा पंडाल

178 वर्ष पुरानी गोपीपुर की रामलीला में राम-केवट संवाद, सीता हरण और सुग्रीव मित्रता का हुआ भावपूर्ण मंचन

जौनपुर, 27 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के सिरकोनी ब्लॉक अंतर्गत गोपीपुर (कजगांव) में 178 वर्षों से आयोजित हो रही ऐतिहासिक बुढ़वा बाबा रामलीला समिति के तत्वावधान में सोमवार रात राम-केवट संवाद, मारीच द्वारा सीता हरण और भगवान राम-सुग्रीव मित्रता की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। राम-केवट संवाद के मार्मिक प्रसंग ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। वहीं, जय श्रीराम के जयकारों से पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा।

रामलीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व एसपी राममोहन सिंह और ग्राम प्रधान आरती अखिलेंद्र सिंह ने फीता काटकर तथा भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता की आरती उतारकर किया। इस अवसर पर राममोहन सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए और सदैव सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए।

मंचन के दौरान वनवास के समय भगवान राम और केवट के बीच हुए संवाद ने दर्शकों को भावुक कर दिया। केवट का संवाद, ‘मांगी नाव न केवट आना, कहहुं तुम्हारा मरम न हम जाना’ सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

लीला के अनुसार, राजा दशरथ द्वारा कैकेयी को दिए गए वचनों को पूरा करने के लिए भगवान राम वनगमन स्वीकार कर लेते हैं। माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या से निकलने के बाद वे सुमंत को वापस भेज देते हैं और पैदल चलते हुए नदी तट पर पहुंचते हैं। नदी पार कराने के लिए केवट को बुलाया जाता है। भगवान राम को पहचानने के बाद केवट उनके चरण धोए बिना नाव पर बैठाने से इनकार कर देता है। वह कहता है कि यदि उनके चरणों का स्पर्श पाकर उसकी नाव भी किसी स्त्री में बदल गई तो उसका जीवनयापन कैसे होगा। भगवान राम की सहमति मिलने पर केवट उनके चरण पखारता है और फिर नाव से नदी पार कराता है। इस प्रसंग का मंचन देखकर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।

दूसरे दृश्य में रावण द्वारा माता सीता के हरण और उन्हें बचाने के लिए जटायु के साथ हुए युद्ध का मंचन किया गया। इस दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इसके साथ ही भगवान राम और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया।

रामलीला का संचालन अमित सिंह जुगनू ने किया। इस मौके पर समिति के प्रबंधक संतोष सिंह दादा, डायरेक्टर मनोज सिंह महाजन, उप डायरेक्टर सूर्यभान सिंह लुटूर, अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान आरती अखिलेश सिंह, उपाध्यक्ष सत्यपाल सिंह सत्तू, संरक्षक रविंद्र बहादुर सिंह पप्पू, शिवशंकर सिंह बचानू, अजय सिंह, हरिकेश सिंह, राय साहब, संजू गुप्ता, धीरज धनेजा, अनिल सिंह, टोनू सिंह, विभु, शिवा सिंह, रजनीश चौबे, अनुज सिंह, भीम यादव, शैलेश यादव, विपिन सिंह पिंटू और मीडिया प्रभारी प्रभाकर सिंह योगी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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