दीपक श्रीवास्तव
नवरात्रि महापर्व शक्ति उपासना, साधना और आत्मशुद्धि का प्रतीक
जौनपुर।नवरात्रि भारत के प्रमुख धार्मिक पर्वों में से एक है। वर्ष में दो बार मनाए जाने वाले इस पर्व को शारदीय और वासंतिक नवरात्रि कहा जाता है। शारदीय नवरात्रि आश्विन मास में और वासंतिक नवरात्रि चैत्र मास में मनाई जाती है। यह पर्व नारी शक्ति, प्रकृति और सृजन की दिव्य ऊर्जा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। यह जानकारी ज्योतिष शिरोमणि, मौसम विज्ञानी एवं निदेशक डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने दी।
महिषासुर वध से जुड़ी है मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महिषासुर के अत्याचारों से परेशान देवताओं ने अपनी शक्तियों के समन्वय से मां दुर्गा का आवाहन किया। नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद देवी ने दसवें दिन महिषासुर का वध किया। इसी विजय की स्मृति में नवरात्रि और विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की विजय का संदेश देता है।
नौ दिनों में नौ स्वरूपों की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार व्रत, पूजन, जप और हवन करते हैं।
कलश स्थापना और पूजा विधि
डॉ. सिंह के अनुसार, पूजा स्थल की साफ-सफाई कर कलश स्थापना करनी चाहिए। इसके लिए जल से भरा कलश, आम के पत्ते, नारियल, रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य आदि सामग्री रखी जाती है। शुभ मुहूर्त में मां दुर्गा का आवाहन कर विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। मंत्रों का ज्ञान न होने पर भी श्रद्धापूर्वक माता का स्मरण किया जा सकता है।
आत्मसंयम और स्वच्छता का संदेश
नवरात्रि का धार्मिक महत्व होने के साथ इसका दार्शनिक संदेश भी है। यह पर्व मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसी बुराइयों पर नियंत्रण रखने तथा सदाचार अपनाने की प्रेरणा देता है। पूजा के दौरान स्वच्छता, संयम और सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए। व्रत अपनी श्रद्धा, स्वास्थ्य और सामर्थ्य के अनुसार रखना उचित है।
डॉ. सिंह ने बताया कि नवरात्रि प्रकृति के बदलाव के समय मनाया जाने वाला पर्व भी है। इस दौरान स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और संतुलित जीवनशैली अपनाने का संकल्प लेना चाहिए। मां दुर्गा की आराधना का मूल उद्देश्य शक्ति, साहस, सकारात्मकता और मानवीय मूल्यों को जीवन में स्थापित करना है।