दीपक श्रीवास्तव/अम्बरीष सक्सेना
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का अपमान सत्य सनातन धर्म पर उत्तर प्रदेश प्रशासन का खुला हमला
अयोध्या । अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने प्रयागराज माघ मेले में जगतगुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज और उनके शिष्यों - बटुकों के साथ पुलिस प्रशासन द्वारा अपमानजनक व्यवहार की कड़ी आलोचना करते हुए इसे सत्य सनातन धर्म पर उत्तर प्रदेश प्रशासन का खुला हमला बताया। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य का विषय है कि एक संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में जगतगुरू शंकराचार्य के साथ उन्हीं का पुलिस प्रशासन घोर अपमान करता है और योगी आदित्यनाथ सरकार दोषी पुलिस के विरुद्ध उचित कदम न उठाकर दोषी पुलिस कर्मियों का मनोबल बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि हिन्दू महासभा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से दोषी पुलिस कर्मियों को दंडित करते हुए अपनी इस त्रुटि को सुधारने का परामर्श दिया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने परामर्श में कहा कि जगतगुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से पुलिस द्वारा शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना अनुचित और सत्य सनातन धर्म की परंपरा के विपरीत है। किसी को भी शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगने का अधिकार केवल भगवान आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित पीठ के शंकराचार्यो और उनकी पीठ को है। वैसे भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं जो उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगने की जरूरत पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य के इस अपमान से देश भर के सनातनियों के हृदय में आक्रोश की ज्वाला धधक रही है। यदि समय रहते योगी सरकार ने अपनी इस त्रुटि को नहीं सुधारा तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में धर्म निरपेक्ष मुस्लिम परस्त राजनीतिक दल इस विषय का राजनीतीकरण करते हुए लाभ उठाने का प्रयास करेंगे। ऐसा होने पर भाजपा को चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय मंत्री अधिवक्ता राकेश दत्त मिश्र ने आज इस आशय की जानकारी देते हुए कहा कि जगतगुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मां गंगा में डुबकी लगाने से रोकने की घटना को संपूर्ण सनातन समाज के अपमान से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज में गंगा स्नान हेतु सादर आमंत्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने योगी आदित्यनाथ के शासन की तुलना घनानंद के उस शासन से कर दी, जिसमें घनानंद ने चाणक्य का अपमान किया था। चाणक्य ने अपने अपमान का बदला किस तरह लिया था, वो आज भी इतिहास के पन्नों में अंकित है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार से इतिहास की इस घटना से सबक लेने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि जगतगुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यह अपमान सनातन समाज किसी भी कीमत पर नहीं सहेगा।
अधिवक्ता मिश्र ने कहा कि प्रयागराज में पुलिस प्रशासन से शंकराचार्य के सम्मान में त्रुटि अवश्य हुई है। योगी आदित्यनाथ ने धर्मसम्मत भारतीय राजनीति के जिस युग का आगाज किया है, वो इस विषम परिस्थिति को बेहतर समझते हैं और इस विषय पर समय रहते धर्मसम्मत निर्णय लेते हुए हिंदुओं के आक्रोश को शांत करने में अवश्य सफल होंगे। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देश की पहली पसंद है और पहली पसंद बने रहने के लिए उन्हें इस विवाद का सर्वमान्य हल निकालना ही होगा।