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वरिष्ठ भाजपा नेता ज्ञान प्रकाश सिंह की अनूठी पहलजौनपुर में पत्रकारों ने देखी बाबा नीब करौरी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश

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दीपक श्रीवास्तव 
वरिष्ठ भाजपा नेता ज्ञान प्रकाश सिंह की अनूठी पहल
जौनपुर में पत्रकारों ने देखी बाबा नीब करौरी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’

सेवा संकल्प अभियान के तहत डीडी प्लेक्स सिनेमा हॉल में विशेष निःशुल्क प्रदर्शन
 पूजन और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
जौनपुर। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह ने जनपदवासियों को आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और सेवा के भाव से जोड़ने की दिशा में एक अनूठी पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर शुरू किए गए ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत बुधवार को जौनपुर के डीडी प्लेक्स सिनेमा हॉल में पूज्य संत बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन एवं उनके आध्यात्मिक विचारों पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की विशेष निःशुल्क स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। ज्ञान प्रकाश सिंह के सौजन्य से आयोजित इस विशेष प्रदर्शन में जनपद के वरिष्ठ पत्रकारों, डिजिटल मीडिया प्रतिनिधियों और डिजिटल क्रिएटर्स ने फिल्म देखी।‌ फिल्म की शुरुआत से पहले सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। 
 इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता ज्ञान प्रकाश सिंह ने कहा कि श्री बजरंग बली की प्रेरणा से मेरे मन में यह सुविचार आया कि यह फिल्म अधिक से अधिक युवाओं, छात्रों को दिखाने का अवसर प्रदान करू। उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी को देश की धर्म संस्कृति से जोड़े रखना जरूरी है। श्री सिंह ने कहा कि एक सप्ताह तक डीडी फ्लेक्स सिनेमा हॉल दो शो में लोगों को फिल्म दिखानी की व्यवस्था मेरे द्वारा की गई है। उन्होंने कहा कि इस विशेष स्क्रीनिंग का उद्देश्य केवल फिल्म प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूज्य बाबा नीब करौरी जी महाराज के जीवन से जुड़े भक्ति, सेवा, करुणा और मानवता के संदेश को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाना भी है।‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत देशभर में विभिन्न सेवा एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जौनपुर में आयोजित यह फिल्म स्क्रीनिंग भी इसी क्रम में लोगों को सेवा और सामाजिक सहभागिता के भाव से जोड़ने की पहल के रूप में सामने आई है।
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समर्पण सेवा संस्थान ने सदर अस्पताल में वितरित किया पोषण आहार एवं आवश्यक सामग्री

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दीपक श्रीवास्तव 
समर्पण सेवा संस्थान ने सदर अस्पताल में वितरित किया पोषण आहार एवं आवश्यक सामग्री
जौनपुर। समर्पण सेवा संस्थान द्वारा मंगलवार को सदर अस्पताल में सेवा एवं राहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान अस्पताल में भर्ती कुपोषित बच्चों, अग्निदग्ध मरीजों, महिला वार्ड एवं जनरल वार्ड के मरीजों को फल, पोषण आहार एवं आवश्यक सामग्री वितरित की गई।

कार्यक्रम में संस्थान की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती ज्योति श्रीवास्तव एवं संस्थापक प्रबंधक डॉ. मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों ने अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं बच्चों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना तथा उन्हें फल एवं आवश्यक सामग्री प्रदान की।
इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती ज्योति श्रीवास्तव ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक सेवा, सहयोग और संवेदना पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि समर्पण सेवा संस्थान भविष्य में भी स्वास्थ्य, शिक्षा, राहत एवं जनसेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य करता रहेगा।

सेवा एवं राहत प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री मनीष श्रीवास्तव ने कहा, “सेवा वही है, जो किसी जरूरतमंद के चेहरे पर राहत और मुस्कान ला सके। हमें ऐसे सेवा कार्य निरंतर करते रहना चाहिए और समाज के जरूरतमंद लोगों के साथ खड़े रहना चाहिए।”

कार्यक्रम में सचिव श्री आशीष श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष श्रीमती सोनी जायसवाल, सेवा एवं राहत प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती देवेंद्र कौर, अध्यक्ष मीडिया एवं प्रचार प्रसार प्रकोष्ठ इंजीनियर आदर्श तिवारी, सदस्यता एवं विस्तार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री दिलीप जायसवाल, शिक्षा विभाग की सचिव श्रीमती यामिनी सिंह, खेल विभाग की सचिव श्रीमती पूजा श्रीवास्तव तथा पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष मोहम्मद असगर सहित सक्रिय सदस्य अमिता श्रीवास्तव, चंद्र प्रकाश सिंह, राजीव सिंह एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

समर्पण सेवा संस्थान ने जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि संस्था का प्रयास आगे भी जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाना और समाज में सेवा एवं मानवता की 
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लगातार मिल रही हार से बौखलाई कांग्रेस अपनी राजनीतिक नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है: अजीत प्रजापति

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दीपक श्रीवास्तव 
लगातार मिल रही हार से बौखलाई कांग्रेस अपनी राजनीतिक नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है: अजीत प्रजापति 
जौनपुर। चुनाव आयोग और एस एस आई आर को लेकर बीजेपी जिलाध्यक्ष अजित प्रजापति ने विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग पर उठाए गए सवाल पर विस्तार से चर्चा की 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए प्रशासनिक एवं संवैधानिक विषयों को राजनीतिक ढाल बनाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने से कांग्रेस की समस्याओं का समाधान नहीं होगा लगातार मिल रही हार से बौखलाई कांग्रेस अपनी राजनीतिक नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करने के बजाय कांग्रेस और उसके नेता जनादेश का अनादर करने की अपनी पुरानी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं।
कांग्रेस के तमाम बड़े नेता जान चुके हैं कि संवैधानिक व्यवस्था एवं लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में वे अब जनता का विश्वास पुनः हासिल नहीं कर सकते हैं यही वजह है कि वे पूरे जनतांत्रिक सिस्टम पर भ्रम एवं झूठ फैलाकर, उन्हें ध्वस्त करना चाहते हैं इसी रणनीति के तहत वे संवैधानिक संस्थाओं पर अनर्गल हमला करते हैं। कांग्रेस जब भी चुनाव हारती है, तब-तब वह चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रचती है। अपनी जमीनी विफलता से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के झूठे और बेबुनियाद बयान दिए जाते हैं।

चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाशः भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति पूरी तरह ध्वस्त हुई है चुनाव आयोग की बैठक और संयुक्त प्रेस नोट से दूध का दूध और पानी का पानी हुआ, कांग्रेस व विपक्ष सिर्फ और सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। कांग्रेस का झूठ बेनकाब हो गया तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए एसआईआर समेत सभी फैसले, निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का प्रतीक ।

कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा पत्र किसी नीतिगत विषय या एसआईआर से संबंधित नहीं था एक अखबार की रिपोर्ट कोरी कल्पना पर आधारित गढ़ी गई कहानी साबित हुई फॉर्म-6 के घोषणापत्र को माननीय सर्वोच्च न्यायालय पहले ही वैध ठहरा चुका है विपक्ष की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश फिर नाकाम हुई है।

कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है चुनाव आयोग की स्पष्टता के बाद कांग्रेस के आरोपों की वास्तविकता सामने आ गई है. ऐसे में कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए जब भी विपक्ष जनता की अदालत में पराजित होता है वह अपनी खीझ और हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढ़ने लगता है। निर्वाचन आयोग पर स्पष्ट और कड़े वक्तव्य ने विपक्ष के सभी और दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है।

विपक्ष द्वारा एक तथाकथित पत्र को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा था, आयोग ने साफ कर दिया है कि केबिनेट सेक्रेटरी को लिखा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी प्रभाग से संबंधित नहीं था बल्कि यह प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के प्रशासनिक कार्यप्रणाली तक सीमित आंतरिक मामला था। न तो यह निर्णय आयोग के किसी नीतिगत विषय के खिलाफ था और न ही एक एसआईआर से जुड़ा हुआ था एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक कहानी प्रतीत होती है उस रिपोर्ट में न तो कोई ठोस तथ्य था और न ही सच्चाई। विपक्ष ने एक काल्पनिक और तथ्यहीन लेख को हथियार बनाकर देश के लोकतंत्र और स्वतंत्र चुनाव आयोग पर सवाल उठाने की नाकाम कोशिश की, अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है।

विपक्ष लगातार फॉर्म-6 को लेकर जनता में भ्रांति पैदा करने का षड़यंत्र रच रहा था। चुनाव आयोग ने दो-टूक कहा है कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 से संत घोषणापत्र को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्ण सही व वैध ठहराया है विपक्ष केवल अफवाहें फैलाता है, जबकि आयोग जमीनी स्तर पर हर मतदाता की भागीदारी सुनिक्षित कर रहा है चाहे वह रैन बसेरों, मजदूरों और बेघरों के लिए विशेष कैंप लगाना हो या छूटे हुए लोगों के घरों पर जाकर बीएलओं द्वारा फॉर्म एकत्र करना हो।

देश की जनता भली-भांति जानती है कि जितने भी राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, वे पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से संपन्न हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जब चुनाव हारते हैं, तो कभी ईवीएम पर, कभी संवैधानिक संस्थाओं पर तो कभी चुनाव आयोग पर झूठे आरोप लगाते है लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान और उसके बाद एलन मस्क के एक बयान का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने ईवीएम को भारतीय लोकतंत्र के लिए ब्लैक बाक्स दिया था। उन्होंने दावा किया कि संस्थागत पारदर्शिता की कमी है, जबकि चुनाव बार-बार ईवीएम की सुरक्षा और विश्वसनीयता को प्रमाणित कर चुके हैं।

चुनावी प्रक्रिया और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल-राहुल गांधी राहुल गांधी ने कई बार आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है और यह एक कठपुतली बन चुका है। लेकिन हर बार राहुल गाँधी के झूठ को न्याय की अदालत ने खारिज किया है। ये हर बार झूठे आरोप लगाकर भाग जाते हैं राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक तकनीकी आदेश को तोड़-मरोड़ कर राहुल गांधी ने मीडिया के सामने दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है। इस मामले में अदालत द्वारा अवमानना नोटिस जारी किए जाने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी।

पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक के सबूत मांगने और वायुसेना के दावों पर सवाल उठाने के आरोप लगे अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद राहुल गांधी ने बयान दिया था कि चीन के सैनिक हमारे जवानों को पीट रहे हैं सेना और सरकार दोनों ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की थी।

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को देश की संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाना बंद कर जनता से इस झूठे प्रचार के लिए माफी मांगनी चाहिए।उक्त अवसर पर राज्य सभा सांसद सीमा द्विवेदी लोकसभा के प्रत्याशी कृपा शंकर सिंह पीयूष गुप्ता अजय सिंह जिला मीडिया प्रभारी आमोद सिह प्रद्युम्न तिवारी उपस्थित रहे।

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पूर्व माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने जताई जान का खतरा, राज्यमंत्री समेत अन्य पर लगाए गंभीर आरोप

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दीपक श्रीवास्तव 

पूर्व माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने जताई जान का खतरा, राज्यमंत्री समेत अन्य पर लगाए गंभीर आरोप

जौनपुर, 29 सितंबर । पूर्व माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) आशाराम ने 12 सितंबर को अपने साथ हुई कथित मारपीट की घटना के बाद जान का खतरा जताया है। उन्होंने मंगलवार को जारी प्रेसवार्ता संबंधी पत्र में पुलिस पर शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं करने और मेडिकल परीक्षण नहीं कराने का आरोप लगाया है।

प्रो. आशाराम के अनुसार, 12 सितंबर की सुबह करीब छह बजे वह जफराबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में मॉर्निंग वॉक कर रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति ने कथित रूप से उन पर हमला कर मारपीट की और पूर्व में दर्ज मुकदमा वापस लेने की धमकी दी। उन्होंने बताया कि मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर उन्हें बचाया।

पूर्व अध्यक्ष का आरोप है कि घटना की सूचना पुलिस को देने के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने बताया कि जफराबाद थानाध्यक्ष, पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी से दो बार मिलकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की, लेकिन उनके अनुसार कोई कार्रवाई नहीं हुई।

प्रेसवार्ता संबंधी पत्र में प्रो. आशाराम ने राज्यमंत्री गिरीश चन्द्र यादव समेत कुछ अन्य लोगों पर कथित साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पूर्व में उनके द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों के चलते उनके खिलाफ हमला कराया गया। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा है और भविष्य में उनकी हत्या की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

प्रो. आशाराम ने पुलिस और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर मुकदमा दर्ज करने तथा अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

हालांकि, प्रो. आशाराम की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राज्यमंत्री गिरीश चन्द्र यादव अथवा अन्य आरोपितों की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।

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पेंशनर्स ने धरना देकर केंद्र सरकार की नीतियों का किया विरोध

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दीपक श्रीवास्तव 
पेंशनर्स ने धरना देकर केंद्र सरकार की नीतियों का किया विरोध
जौनपुर, 29 सितंबर । यूपी  के जौनपुर में सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में पेंशनर्स ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के माध्यम से केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सिटी मजिस्ट्रेट माहिपाल सिंह को सौंपा गया।
संगठन के जिलाध्यक्ष सीबी सिंह की अध्यक्षता में हुई सभा का संचालन जिला मंत्री कृपाशंकर उपाध्याय ने किया। जिलाध्यक्ष ने कहा कि आठवें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनर्स को शामिल नहीं किए जाने से पेंशनर्स में रोष है। उन्होंने कहा कि सरकार को तिथि के आधार पर पेंशनर्स के बीच किए जा रहे विभेद को समाप्त कर पुराने पेंशनर्स को भी आठवें वेतन आयोग के दायरे में लाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार की इस नीति के खिलाफ पेंशनर्स को संगठन के आह्वान पर बड़े संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा। सभा में 12 सूत्रीय मांगों का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
प्रमुख मांगों में पुराने पेंशनर्स को आठवें वेतन आयोग में शामिल करने, वेतन आयोग की प्रक्रिया में विलंब होने की स्थिति में अंतरिम राहत देने, कर्मचारियों, पेंशनर्स और शिक्षकों के लिए अलग सीपीआई लागू करने, 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर प्रत्येक पांच वर्ष में पांच प्रतिशत पेंशन वृद्धि करने तथा महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से अधिक होने पर उसे मूल पेंशन में मर्ज करने की मांग शामिल रही।
जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट महिपाल सिंह ने धरना स्थल पर पहुंचकर ज्ञापन प्राप्त किया और उसे प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री तक भेजने का आश्वासन दिया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक राकेश कुमार श्रीवास्तव ने भी मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग की। सभा में कृष्ण कुमार त्रिपाठी, प्रमोद कुमार सिंह, दसरथ राम, चंद्रशेखर सिंह, रामकृष्ण यादव सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स मौजूद रहे।

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शैक्षिक गुणवत्ता, डिजिटल उपस्थिति और नामांकन शत-प्रतिशत कराने पर जोर

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दीपक श्रीवास्तव 

शैक्षिक गुणवत्ता, डिजिटल उपस्थिति और नामांकन शत-प्रतिशत कराने पर जोर



जौनपुर, 28 सितंबर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित गतिविधियों एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को विकासखंड मुंगराबादशाहपुर के समस्त प्रधानाध्यापकों एवं प्रभारी प्रधानाध्यापकों की मासिक समीक्षा बैठक ब्लॉक संसाधन केंद्र के सभागार में हुई। बैठक में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी समीर ने प्रतिभाग किया।

बैठक में एनबीएमएमसी पोर्टल के आधार पर डेटा विश्लेषण, यू-डायस पोर्टल पर बच्चों का आधार सत्यापन एवं नवीन नामांकन शत-प्रतिशत कराने पर जोर दिया गया। प्रेरणा पोर्टल पर समय-सारिणी और बच्चों की डिजिटल उपस्थिति दर्ज करने तथा स्मार्ट क्लास के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षिक अधिगम को बढ़ाने पर चर्चा हुई। डिजिटल लाइब्रेरी के प्रभावी उपयोग के निर्देश भी दिए गए।

प्रधानाध्यापकों को प्रेरणा डीबीटी एप पर बच्चों की फोटो अपलोड करने तथा इंस्पायर अवार्ड एवं राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित परीक्षा में अधिक से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन कराने के निर्देश दिए गए।

खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. अविनाश सिंह ने विद्यालय परिसर, कक्षा-कक्ष एवं शौचालयों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने प्रार्थना सभा के माध्यम से बच्चों में स्वच्छ आदतों के विकास, मेन्यू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन वितरण तथा विद्यार्थियों को निपुण बनाने के लिए प्रभावी शिक्षण पर बल दिया।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी समीर ने एसएचवीआर नशा मुक्त विद्यालय पोर्टल पर पंजीकरण, बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में अभिभावकों का सहयोग करने तथा लंबित पेंडेंसी का समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सेवा संकल्प अभियान के तहत विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग की सराहना की।

उन्होंने प्रत्येक माह अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित करने के निर्देश देते हुए विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधार, विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा।


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गूलर घाट मठ की जमीन का कब्जा करने से बाज नहीं आ रहे दबंग

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दीपक श्रीवास्तव 
गूलर घाट मठ की जमीन का कब्जा करने से बाज नहीं आ रहे दबंग

जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक के चौखट पर पहुंचे फलाहारी महराज
जौनपुर। शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के सरायपोख्ता पुलिस चौकी अन्तर्गत श्रीराम जानकी मठ गूलर घाट की जमीन पर कब्जा करने का मामला सोमवार को पुलिस अधीक्षक एवं जिलाधिकारी के दरबार में पहुंच गया।
मठ के वरिष्ठ पुजारी व प्रबन्धक फलाहारी महाराज के अनुसार उन्होंने थाना कोतवाली और स्थानीय पुलिस चौकी पर मंदिर की जमीन को बचाने के लिये लिखित शिकायत किया परन्तु आज तक किसी प्रकार कोई कार्यवाही नहीं हुई। इससे दबंगों का मनोबल बढ़ता गया जो अब अब मन्दिर के पीछे से मन्दिर की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायत के अनुसार टीनशेड को विपक्षी जितेन्द्र सिंह पुत्र राजेन्द्र सिंह द्वारा कब्जा करने की नियत से तोड़—फोड़ करके अन्दर ही अन्दर दीवाल तोड़ दिया गया है जबकि एक किता सिविल वाद न्यायालय सिविल जज (जे०डी) शहर जौनपुर में जितेन्द्र बनाम रामप्रीति मिश्च दाखिल करके स्थगनादेश मिल गया था। प्रार्थी उस आदेश के खिलाफ जिला जज जौनपुर मुत० अपील 111/2026 ई० को राम प्रीति बनाम जितेन्द्र दाखिल किया जिसमें न्यायालय द्वारा 24 अगस्त 2026 को आदेश पारित करके निर्देशित किया गया कि मौके पर उभय पक्ष यथास्थिति बनाये रखें परन्तु विपक्षी द्वारा 27 सितम्बर को विपक्षी जितेन्द्र सहित परिवार वाले मन्दिर के पीछे जमीन व टीनशेड की दिवाल को तोड़ दिया जबकि प्रार्थी ने 112 नम्बर पर फोन करके घटना से अवगत कराया। जिला जज के आदेश (स्थगन) के बावजूद विपक्षी ने उपरोक्त गैरकानूनी कार्य किया है। दीवार गिराने एवं गलत तरीके से अन्दर की दीवार पर बोर्ड लगाने लगे तो इसकी सूचना सरायपोख्ता पुलिस चौकी को दी गयी। फिर कोई कार्यवाही नहीं हुई, बल्कि जितेन्द्र सहित उनके परिवार के लोग फलाहारी महाराज को गली देने लगे। इतना ही नहीं, पूछने पर जानमाल की धमकी भी दिया।
इसी को लेकर फलाहारी महाराज ने सोमवार को जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से मिलकर लिखित शिकायत करते हुये मन्दिर की जमीन पर किये जा रहे कब्जे को रूकवाने की मांग किया। साथ ही जानमाल की गुहार भी लगायी।
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