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कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन, 800 से अधिक प्रतिमाएं विसर्जित

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दीपक श्रीवास्तव 
कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन, 800 से अधिक प्रतिमाएं विसर्जित
राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव और राज्यसभा सांसद विद्यासागर सोनकर ने आरती उतारकर दिखाई हरी झंडी
जौनपुर, 21 अक्टूबर । शारदीय नवरात्र के समापन के बाद जिले में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन मंगलवार देर रात से बुधवार दोपहर तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुआ। श्री दुर्गा पूजा महासमिति,जौनपुर के अध्यक्ष मनीष देव मंगल और महासचिव मनीष गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित 48 वां भव्य मां प्रतिमा शोभायात्रा व विसर्जन कार्यक्रम के दौरान शहर से लेकर घाटों तक श्रद्धालुओं की भीड़ रही। दोपहर तक लगभग 800 से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस दौरान प्रशासन और पुलिस के अधिकारी लगातार सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे।
शहर के कोतवाली चौराहा स्थित श्री दुर्गा पूजा महासमिति के केंद्रीय कंट्रोल रूम में मंगलवार रात मुख्य अतिथि राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव और विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सांसद विद्यासागर सोनकर पहुंचे। दोनों अतिथियों ने मां दुर्गा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पूजन किया। इसके बाद अहियापुर मोड़ पर विसर्जन के लिए तैयार प्रतिमाओं के समक्ष आरती उतारी। विधिवत पूजन के बाद नारियल फोड़कर हरी झंडी दिखाई और प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए शोभायात्रा के रूप मे रवाना किया। इस अवसर पर महासमिति के अध्यक्ष मनीष देव मंगल, महासचिव मनीष गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। महासमिति की ओर से अतिथियों का माल्यार्पण कर स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया।
प्रतिमाओं के विसर्जन को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। सद्भावना पुल के पास स्थित विसर्जन घाट पर बनाए गए शक्ति कुंड में दोपहर तक प्रतिमाओं का विसर्जन चलता रहा। सभी प्रमुख घाटों पर पुलिस बल के साथ एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तथा स्थानीय गोताखोर तैनात रहे। विसर्जन कुंड के आसपास भी पर्याप्त पुलिस बल लगाया गया था। महासमिति के विसर्जन नोडल अधिकारी लालचंद निषाद के नेतृत्व में सभी प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया।
प्रतिमाओं के मूल्यांकन के लिए पहुंची निर्णायक मंडल की टीम


महासमिति की ओर से प्रतिमाओं को पुरस्कार देने के लिए गठित निर्णायक मंडल के सदस्य देवेश गुप्ता,गायत्री जायसवाल, विष्णू सहाय,सीमा चक्रवाल, प्रदीप सिंह, वंशिका सिंह, डा. योगेन्द्र सिंह भी कोतवाली चौराहा स्थित कंट्रोल रूम में मौजूद रहे। उन्होंने प्रतिमाओं का आकलन किया। महासमिति के अध्यक्ष मनीष देव मंगल ने विसर्जन के लिए पहुंची प्रतिमाओं के अध्यक्षों का माल्यार्पण कर अंगवस्त्रम एंव मां का प्रसाद नारियल चुनरी भेंट कर सम्मानित किया। मोहम्मद शाहिद की नेतृत्व में सभी प्रतिमाओं को अहियापुर मोड़ से विसर्जन घाट तक शोभायात्रा के रूप मे सकुशल पहुंचाया गया

इस अवसर पर संरक्षक इंदू सिंह, शोभनाथ आर्य, चंद्र प्रताप सोनी,विंध्याचल सिंह, श्रीकांत माहेश्वरी, संतोष सिंह, निखिलेश सिंह, राधेकृष्ण ओझा, पूर्व अध्यक्ष शशांक सिंह, मोतीलाल यादव, विजय सिंह बागी,अनिल अस्थाना, उमेश श्रीवास्तव के साथ विशिष्ट सदस्य अनिल साहू,विवेक सिंह, आशीष गुप्ता, अवनिन्द्र तिवारी, गौरव श्रीवास्तव के साथ सदस्य के रुप मे रत्नेश सिंह, राहुल पाठक, विजय रघुवंशी, संजय विश्वकर्मा, संतोष मौर्य, दीपक श्रीवास्तव,
 संजय अग्रहरि, शैलेंद्र मिश्रा, ज्ञानेंद्र दुबे,शिव कुमार मौर्य, सर्वेश यादव, अमित गुप्ता,संजय मोदनवाल, निशाकांत द्विवेदी, विजय गुप्ता,रतन दीप,मयंक मिश्रा, प्रिंस तनेजा, करन बिन्द, अजय गुप्त, और विनोद अग्रहरिसहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
उक्त जानकारी महासमिति के मीडिया प्रभारी दीपक श्रीवास्तव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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भगवान राम के जीवन से जुड़े आदर्शों को अपने जीवन में उतारें : शांतनु जी महाराज

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दीपक श्रीवास्तव 
भगवान राम के जीवन से जुड़े आदर्शों को अपने जीवन में उतारें : शांतनु जी महाराज
जौनपुर। बीआरपी कॉलेज परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान पूज्य शांतनु जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि रामकथा सुनने की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उसकी शिक्षाओं को व्यवहार में उतारा जाए। भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, सत्य, मर्यादा, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा की अनुपम मिसाल है।

महाराज जी ने विभीषण की शरणागति और हनुमान जी के पराक्रम का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि भगवान के प्रति सच्चा समर्पण ही जीवन को सही दिशा देता है। कलियुग में प्रभु श्रीराम का नाम-स्मरण सबसे सरल साधना है। उन्होंने कहा कि रामकथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि इसे गाने, समझने और जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। मनुष्य का मन सर्वोपरि है, इसलिए अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एकाग्रता, समर्पण और दृढ़ संकल्प जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। माता-पिता का सम्मान, पारिवारिक संबंधों का निर्वहन, सत्य के मार्ग पर चलना और समाज में प्रेम एवं सद्भाव बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने श्रद्धालुओं से रामकथा की शिक्षाओं को अपने परिवार और समाज में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर शांतनु जी महाराज ने श्रीराम कथा के मुख्य आयोजक ज्ञान प्रकाश सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद विद्यासागर सोनकर, रमेश जी (प्रांत प्रचारक, काशी प्रांत, आरएसएस), करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीर प्रताप सिंह, रत्नाकर चौबे, अरविन्द सिंह, रत्नसेन सिंह, माउंट लिट्रा जी स्कूल के निदेशक अरविंद सिंह, प्रधानाचार्य डॉ. सत्यप्रकाश सिंह, डॉ. राकेश सिंह, रमेश सिंह, डॉ. मनोज वत्स, डॉ. सुभाष सिंह, राजेश सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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विधि-विधान से राजा हवेली में हुआ शस्त्र पूजन, लगा भव्य दरबार

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दीपक श्रीवास्तव 
विधि-विधान से राजा हवेली में हुआ शस्त्र पूजन, लगा भव्य दरबार
जौनपुर। विजयादशमी के पावन पर्व पर जौनपुर की ऐतिहासिक राजा हवेली में राज परिवार की परंपराओं के अनुरूप इस वर्ष भी शस्त्र पूजन का आयोजन विधि-विधान और राजसी परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। शस्त्र पूजन राजपुरोहित पंडित जनार्दन मिश्र के देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया गया।
राजा जौनपुर अवनींद्र दत्त के अस्वस्थ होने के कारण महाराज दरबार हॉल में उपस्थित नहीं हो सके। हालांकि उनकी अनुपस्थिति में भी राज परिवार की वर्षों पुरानी परंपराओं और निर्धारित रीति-रिवाजों का निर्वहन पूरी श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ किया गया।
शस्त्र पूजन के अवसर पर राजा हवेली में पारंपरिक राज दरबार भी लगाया गया। दरबार में शामिल दरबारी राजसी गणवेश एवं पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। इस दौरान जौनपुर राज्य की पुरानी परंपराओं के अनुरूप प्रतीकात्मक रूप से हवेली में नजराना अर्पित करने की रस्म भी निभाई गई। इस दौरान राजसी परंपरा, अनुशासन और ऐतिहासिक विरासत की झलक देखने को मिली।
शस्त्र पूजन एवं दरबार की रस्मों के बाद विजयादशमी के अवसर पर राजा पोखरे पर भव्य मेले का आयोजन हुआ। मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर उत्सव का आनंद लिया। यहां परंपरागत रूप से रावण दहन किया गया। इसके पश्चात राजा पोखरे पर राजपुरोहित पंडित जनार्दन मिश्र द्वारा शमी पूजन संपन्न कराया गया।
विजयादशमी के इस आयोजन में जौनपुर की ऐतिहासिक राजपरंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला। राजा हवेली में आयोजित कार्यक्रम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। शस्त्र पूजन से लेकर राज दरबार और राजा पोखरे पर आयोजित मेले तक पूरे आयोजन में पुरानी परंपराओं की जीवंत झलक दिखाई दी।
इस अवसर पर डॉ. शंभू राम चौहान प्राचार्य; सत्य राम प्रजापति, प्रबंधक; डॉ. संजय चौबे, प्रधानाचार्य; पूर्व प्राचार्य डॉ. अखिलेश्वर शुक्ल; संजय अस्थाना, श्याम सुंदर दुबे,ओम प्रकाश शाही; सुभाष चंद्र सिंह; पूर्व प्रमुख सुरेंद्र प्रताप सिंह; संत प्रसाद राय; अशोक मिश्रा; अशोक तिवारी; जियाराम यादव; आशा राम यादव; नन्हे सिंह; राज कुमार सिंह; रवि सिंह; लोलारक दुबे; प्रेम प्रकाश मिश्रा; आत्म प्रकाश यादव; डॉ. अजीत कपूर; दिनेश कपूर; आंवले यादव; अवनींद्र तिवारी सहित राज परिवार से जुड़े अनेक लोग मौजूद रहे।
आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों ने जौनपुर की ऐतिहासिक राजपरंपराओं को संरक्षित रखने तथा आने वाली पीढ़ियों तक इन परंपराओं को पहुंचाने के संकल्प को भी दोहराया। विजयादशमी का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ जौनपुर की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर सामने आया।
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हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा, पांच हजार महिलाओं ने निकाली भव्य कलश यात्रा

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दीपक श्रीवास्तव 

हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा, पांच हजार महिलाओं ने निकाली भव्य कलश यात्रा


चार किलोमीटर तक निकली यात्रा, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा शहर


जौनपुर, 20 अक्टूबर । यूपी के जौनपुर में सेवा भारती काशी प्रांत के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा से पूर्व मंगलवार को नगर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पीले परिधानों में सजी पांच हजार से अधिक महिलाएं सिर पर कलश धारण कर यात्रा में शामिल हुईं। इस दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई। करीब चार किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा शहर राममय हो गया।

आदिगंगा गोमती के तट स्थित केरारवीर मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन के बाद सुबह करीब 10 बजे कलश यात्रा शुरू हुई। यात्रा में शामिल महिलाएं सिर पर कलश लेकर चल रही थीं, जबकि पुरुष और युवा जय श्रीराम के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा ने आयोजन को और आकर्षक बना दिया। विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों की धार्मिक झांकियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं।

कलश यात्रा केरारवीर मंदिर से चहारसू चौराहा, ओलंदगंज, रुहट्टा, पॉलिटेक्निक चौराहा और वाजिदपुर तिराहा होते हुए बीआरपी इंटर कॉलेज परिसर स्थित कथा पंडाल में पहुंचकर संपन्न हुई। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। यात्रा में महिलाओं और युवाओं का उत्साह देखते ही बना।

पंडाल में यात्रा के समापन पर 11 ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से कलश स्थापना कराई।

श्रीराम कथा के मुख्य यजमान एवं आयोजक ज्ञान प्रकाश सिंह ने बताया कि बुधवार से प्रतिदिन दोपहर तीन से शाम छह बजे तक कथावाचक आचार्य शांतनु जी महाराज श्रीराम कथा सुनाएंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से समय से पहुंचकर कथा का श्रवण करने की अपील की

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पुष्पवर्षा के बीच 20 अक्टूबर को निकलेगी भव्य कलश यात्रा, रामभक्ति के रंग में रंगेगा जौनपुर

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दीपक श्रीवास्तव 
पुष्पवर्षा के बीच 20 अक्टूबर को निकलेगी भव्य कलश यात्रा, रामभक्ति के रंग में रंगेगा जौनपुर

21 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक बी.आर.पी. कॉलेज के प्रांगण में बहेगी श्रीराम कथा की अमृत धारा, 
ज्ञान प्रकाश सिंह ने माताओं-बहनों से की सहभागिता की अपील

जौनपुर। धर्म, आस्था और भक्ति की पावन धरा जौनपुर एक बार फिर प्रभु श्रीराम की भक्ति से सराबोर होने जा रही है। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी श्री ज्ञान प्रकाश सिंह के सौजन्य से आयोजित होने वाली भव्य श्रीराम कथा के शुभारंभ से पूर्व 20 अक्टूबर को नगर में पुष्पवर्षा, भव्य झांकियों और जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष के बीच विशाल कलश यात्रा निकाली जाएगी। इस धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण है।
कलश यात्रा प्रातः 9 बजे केरार वीर से प्रारंभ होकर चाहरसू चौराहा, ओलंदगंज, पॉलिटेक्निक चौराहा और वाजिदपुर तिराहा होते हुए बी.आर.पी. कॉलेज के प्रांगण स्थित कथा स्थल पर पहुंचकर संपन्न होगी। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के स्वागत और प्रभु श्रीराम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय होने की उम्मीद है।


आकर्षक झांकियां होंगी विशेष आकर्षण

इस भव्य कलश यात्रा में अन्य प्रदेशों से आए भक्तजन विभिन्न प्रकार की मनमोहक धार्मिक झांकियां प्रस्तुत करेंगे। इन झांकियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों, आदर्शों और सनातन संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। पुष्पवर्षा और भक्तिमय वातावरण के बीच निकलने वाली यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था, उल्लास और आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष अवसर बनेगी।

कलश यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, सद्भाव, एकता और सांस्कृतिक चेतना का संदेश देने वाला पावन अवसर भी है। प्रभु श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात कर समाज में मर्यादा, सेवा, त्याग और भाईचारे की भावना को मजबूत करना ही ऐसे आयोजनों का मूल उद्देश्य है।

21 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक होगी श्रीराम कथा

कलश यात्रा के अगले दिन, 21 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक, बी.आर.पी. कॉलेज के प्रांगण में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम की दिव्य लीलाओं, आदर्श जीवन, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होगी। कथा की अमृतमयी वाणी से जौनपुर का वातावरण राममय होने की उम्मीद है।

ज्ञान प्रकाश सिंह की माताओं-बहनों से विशेष अपील

इस पावन आयोजन के संबंध में श्री ज्ञान प्रकाश सिंह ने जनपद की समस्त माताओं एवं बहनों सहित सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस शुभ अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भव्य कलश यात्रा में सम्मिलित हों और आयोजन को सफल बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें।

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए इस धार्मिक आयोजन में सहभागिता निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसे पावन अवसर समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं तथा हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


आइए, हम सभी मिलकर प्रभु श्रीराम के नाम का जयघोष करें और जौनपुर की पावन धरती को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से आलोकित करें।
जय श्रीराम!
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लक्ष्मण शक्ति से भावुक हुए दर्शक,संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान तो गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

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दीपक श्रीवास्तव 
लक्ष्मण शक्ति से भावुक हुए दर्शक,संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान तो गूंजे जय श्रीराम के जयकारे
जौनपुर। हुसेनाबाद में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला में अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति और उसके निवारण के प्रसंगों का भावपूर्ण एवं सजीव मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत कर दिया। अंगद और रावण के बीच तीखे संवादों ने जहां दर्शकों में उत्सुकता पैदा की, वहीं युद्ध के दौरान लक्ष्मण के मूर्छित होने और उनके उपचार के लिए हनुमान के संजीवनी बूटी लाने के दृश्य ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। मंचन के दौरान पंडाल में जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
रामलीला के दौरान लंका में श्रीराम के दूत बनकर पहुंचे अंगद और रावण के बीच संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। अंगद ने रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक श्रीराम को लौटाने और युद्ध का रास्ता छोड़ने की सलाह दी। उन्होंने रावण को उसकी शक्ति और अहंकार के परिणामों से आगाह करते हुए प्रभु श्रीराम की शक्ति का एहसास कराया। दूसरी ओर, रावण अपने अहंकार में चूर होकर अंगद की बात मानने को तैयार नहीं हुआ। दोनों के बीच हुए संवाद ने दर्शकों को रामायण के उस प्रसंग की याद दिलाई, जिसमें सत्य और धर्म के पक्ष में खड़े अंगद ने रावण की सभा में निर्भीकता का परिचय दिया था।
इसके बाद राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण शक्ति प्रसंग का मंचन हुआ। युद्ध में मेघनाद की शक्ति लगने से लक्ष्मण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े। लक्ष्मण की यह दशा देखकर श्रीराम व्याकुल हो उठे। भाई के प्रति उनका प्रेम और चिंता देखकर दर्शक भावुक हो गए। लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए लंका से वैद्य सुषेण को लाने और उनके परामर्श पर संजीवनी बूटी की व्यवस्था करने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।

लक्ष्मण के उपचार के लिए हनुमान के संजीवनी बूटी लाने का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा। हनुमान के पराक्रम, समर्पण और सेवाभाव को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। संजीवनी मिलने के बाद लक्ष्मण के स्वस्थ होने पर रामलीला स्थल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कलाकारों के अभिनय, संवाद अदायगी और प्रसंगों की प्रस्तुति ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।
राम की भूमिका दीपक श्रीवास्तव, लक्ष्मण की शिवा श्रीवास्तव, अंगद की गुंजन श्रीवास्तव, राजकुमार की अरविंद मिश्रा, रावण की अभिनव मिश्रा, हनुमान की मोलू सोनकर, विभीषण की अंकित रावत तथा सुषेण वैद्य की भूमिका चंदन गौड़ ने निभाई। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से रामलीला के प्रसंगों को प्रभावशाली बनाया।

हुसेनाबाद की रामलीला की परंपरा वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। स्थानीय कलाकारों द्वारा रामायण के प्रसंगों का मंचन नई पीढ़ी को मर्यादा, त्याग, भक्ति, भाईचारे और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है
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हुसेनाबाद की रामलीला में राम-सुग्रीव मित्रता से लंका दहन तक जीवंत हुई रामकथा

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दीपक श्रीवास्तव 

हुसेनाबाद की रामलीला में राम-सुग्रीव मित्रता से लंका दहन तक जीवंत हुई रामकथा


राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध, सीता हरण और हनुमान के पराक्रम का हुआ भावपूर्ण मंचन, श्रद्धा और भक्ति में डूबे दर्शक


जौनपुर। हुसेनाबाद में शनिवार की रात रामभक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामलीला समिति हुसेनाबाद के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता, बाली वध, नककटैया, सीता हरण और लंका दहन के प्रसंगों का सजीव एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। स्थानीय कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवादों और शानदार प्रस्तुतियों से रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया। जैसे-जैसे लीला आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे पूरा वातावरण प्रभु श्रीराम की भक्ति और जयकारों से गुंजायमान होता रहा। श्रद्धालु रामकथा के प्रसंगों में भावविभोर होकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों का स्मरण करते नजर आए।


रामलीला का शुभारंभ भगवान श्रीराम की महिमा और उनके आदर्शों के स्मरण के साथ हुआ। राम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंग में भगवान श्रीराम और सुग्रीव के बीच विश्वास, सहयोग तथा मित्र धर्म की सुंदर झलक देखने को मिली। विपरीत परिस्थितियों में एक-दूसरे का साथ निभाने का संदेश देने वाले इस प्रसंग ने दर्शकों को मित्रता के वास्तविक अर्थ से परिचित कराया। इसके बाद बाली वध की लीला का मंचन हुआ, जिसमें कलाकारों ने अपने अभिनय से कथा के घटनाक्रम को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया। धर्म, न्याय और वचनबद्धता से जुड़े इस प्रसंग ने दर्शकों को रामायण के आदर्शों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।


इसके बाद नककटैया की लीला ने मंच पर उत्साह और रोमांच का वातावरण बना दिया। सूर्पणखा के प्रसंग में कलाकारों ने अपने संवाद और अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद मारीच के स्वर्ण मृग का रूप धारण करने और भगवान श्रीराम को वन में दूर ले जाने के प्रसंग के माध्यम से सीता हरण की कथा को आगे बढ़ाया गया। साधु के वेश में आए रावण द्वारा माता सीता का हरण किए जाने का दृश्य देखकर दर्शक रामायण के इस महत्वपूर्ण प्रसंग में भावनात्मक रूप से जुड़ गए। इस दृश्य ने छल, अधर्म और अहंकार के दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।


रामलीला का सबसे रोमांचक और भक्तिमय दृश्य लंका दहन का रहा। माता सीता की खोज में लंका पहुंचे पवनपुत्र हनुमान के पराक्रम, बुद्धिमत्ता और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण को कलाकार ने शानदार ढंग से मंच पर उतारा। हनुमान के जयकारों और लंका दहन के दृश्य के दौरान दर्शकों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। पूरा वातावरण जय श्रीराम और जय बजरंगबली के उद्घोष से भक्तिमय हो उठा। हनुमान जी की भक्ति और वीरता ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि सच्ची निष्ठा, साहस और प्रभु के प्रति समर्पण से बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है।


रामलीला में भगवान श्रीराम की भूमिका प्रवीण श्रीवास्तव, लक्ष्मण की भूमिका शिवा श्रीवास्तव तथा माता सीता का मोलू सोनकर, सूर्पणखा की भूमिका राज रावत, खर-दूषण की भूमिका राजेश यादव, मारीच की भूमिका दीपक श्रीवास्तव, साधु रूपी रावण की भूमिका दीपक मिश्रा, हनुमान की भूमिका अजय तिवारी, रावण की भूमिका अभिनव मिश्रा, सुग्रीव की भूमिका वेद मिश्रा, बाली की भूमिका शिवांग मिश्रा, ने संवादों, भाव-भंगिमाओं और पात्रों के अनुरूप अभिनय के माध्यम से रामायण की कथा को दर्शकों के सामने सजीव कर दिया।


हुसेनाबाद की रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। 80 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की मर्यादा, लक्ष्मण की सेवा भावना और हनुमान जी की अनन्य भक्ति से परिचित कराया जा रहा है। रामलीला का प्रत्येक प्रसंग यह संदेश देता है कि जीवन में सत्य, धर्म, प्रेम और कर्तव्य का मार्ग ही सर्वोत्तम है तथा अंततः अधर्म और अहंकार पर धर्म की विजय निश्चित है।

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