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पुष्पवर्षा के बीच 20 अक्टूबर को निकलेगी भव्य कलश यात्रा, रामभक्ति के रंग में रंगेगा जौनपुर

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दीपक श्रीवास्तव 
पुष्पवर्षा के बीच 20 अक्टूबर को निकलेगी भव्य कलश यात्रा, रामभक्ति के रंग में रंगेगा जौनपुर

21 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक बी.आर.पी. कॉलेज के प्रांगण में बहेगी श्रीराम कथा की अमृत धारा, 
ज्ञान प्रकाश सिंह ने माताओं-बहनों से की सहभागिता की अपील

जौनपुर। धर्म, आस्था और भक्ति की पावन धरा जौनपुर एक बार फिर प्रभु श्रीराम की भक्ति से सराबोर होने जा रही है। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी श्री ज्ञान प्रकाश सिंह के सौजन्य से आयोजित होने वाली भव्य श्रीराम कथा के शुभारंभ से पूर्व 20 अक्टूबर को नगर में पुष्पवर्षा, भव्य झांकियों और जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष के बीच विशाल कलश यात्रा निकाली जाएगी। इस धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण है।
कलश यात्रा प्रातः 9 बजे केरार वीर से प्रारंभ होकर चाहरसू चौराहा, ओलंदगंज, पॉलिटेक्निक चौराहा और वाजिदपुर तिराहा होते हुए बी.आर.पी. कॉलेज के प्रांगण स्थित कथा स्थल पर पहुंचकर संपन्न होगी। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के स्वागत और प्रभु श्रीराम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय होने की उम्मीद है।


आकर्षक झांकियां होंगी विशेष आकर्षण

इस भव्य कलश यात्रा में अन्य प्रदेशों से आए भक्तजन विभिन्न प्रकार की मनमोहक धार्मिक झांकियां प्रस्तुत करेंगे। इन झांकियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों, आदर्शों और सनातन संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। पुष्पवर्षा और भक्तिमय वातावरण के बीच निकलने वाली यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था, उल्लास और आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष अवसर बनेगी।

कलश यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, सद्भाव, एकता और सांस्कृतिक चेतना का संदेश देने वाला पावन अवसर भी है। प्रभु श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात कर समाज में मर्यादा, सेवा, त्याग और भाईचारे की भावना को मजबूत करना ही ऐसे आयोजनों का मूल उद्देश्य है।

21 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक होगी श्रीराम कथा

कलश यात्रा के अगले दिन, 21 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक, बी.आर.पी. कॉलेज के प्रांगण में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम की दिव्य लीलाओं, आदर्श जीवन, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होगी। कथा की अमृतमयी वाणी से जौनपुर का वातावरण राममय होने की उम्मीद है।

ज्ञान प्रकाश सिंह की माताओं-बहनों से विशेष अपील

इस पावन आयोजन के संबंध में श्री ज्ञान प्रकाश सिंह ने जनपद की समस्त माताओं एवं बहनों सहित सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस शुभ अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भव्य कलश यात्रा में सम्मिलित हों और आयोजन को सफल बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें।

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए इस धार्मिक आयोजन में सहभागिता निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसे पावन अवसर समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं तथा हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


आइए, हम सभी मिलकर प्रभु श्रीराम के नाम का जयघोष करें और जौनपुर की पावन धरती को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से आलोकित करें।
जय श्रीराम!
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लक्ष्मण शक्ति से भावुक हुए दर्शक,संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान तो गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

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दीपक श्रीवास्तव 
लक्ष्मण शक्ति से भावुक हुए दर्शक,संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान तो गूंजे जय श्रीराम के जयकारे
जौनपुर। हुसेनाबाद में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला में अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति और उसके निवारण के प्रसंगों का भावपूर्ण एवं सजीव मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत कर दिया। अंगद और रावण के बीच तीखे संवादों ने जहां दर्शकों में उत्सुकता पैदा की, वहीं युद्ध के दौरान लक्ष्मण के मूर्छित होने और उनके उपचार के लिए हनुमान के संजीवनी बूटी लाने के दृश्य ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। मंचन के दौरान पंडाल में जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
रामलीला के दौरान लंका में श्रीराम के दूत बनकर पहुंचे अंगद और रावण के बीच संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। अंगद ने रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक श्रीराम को लौटाने और युद्ध का रास्ता छोड़ने की सलाह दी। उन्होंने रावण को उसकी शक्ति और अहंकार के परिणामों से आगाह करते हुए प्रभु श्रीराम की शक्ति का एहसास कराया। दूसरी ओर, रावण अपने अहंकार में चूर होकर अंगद की बात मानने को तैयार नहीं हुआ। दोनों के बीच हुए संवाद ने दर्शकों को रामायण के उस प्रसंग की याद दिलाई, जिसमें सत्य और धर्म के पक्ष में खड़े अंगद ने रावण की सभा में निर्भीकता का परिचय दिया था।
इसके बाद राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण शक्ति प्रसंग का मंचन हुआ। युद्ध में मेघनाद की शक्ति लगने से लक्ष्मण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े। लक्ष्मण की यह दशा देखकर श्रीराम व्याकुल हो उठे। भाई के प्रति उनका प्रेम और चिंता देखकर दर्शक भावुक हो गए। लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए लंका से वैद्य सुषेण को लाने और उनके परामर्श पर संजीवनी बूटी की व्यवस्था करने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।

लक्ष्मण के उपचार के लिए हनुमान के संजीवनी बूटी लाने का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा। हनुमान के पराक्रम, समर्पण और सेवाभाव को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। संजीवनी मिलने के बाद लक्ष्मण के स्वस्थ होने पर रामलीला स्थल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कलाकारों के अभिनय, संवाद अदायगी और प्रसंगों की प्रस्तुति ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।
राम की भूमिका दीपक श्रीवास्तव, लक्ष्मण की शिवा श्रीवास्तव, अंगद की गुंजन श्रीवास्तव, राजकुमार की अरविंद मिश्रा, रावण की अभिनव मिश्रा, हनुमान की मोलू सोनकर, विभीषण की अंकित रावत तथा सुषेण वैद्य की भूमिका चंदन गौड़ ने निभाई। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से रामलीला के प्रसंगों को प्रभावशाली बनाया।

हुसेनाबाद की रामलीला की परंपरा वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। स्थानीय कलाकारों द्वारा रामायण के प्रसंगों का मंचन नई पीढ़ी को मर्यादा, त्याग, भक्ति, भाईचारे और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है
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हुसेनाबाद की रामलीला में राम-सुग्रीव मित्रता से लंका दहन तक जीवंत हुई रामकथा

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दीपक श्रीवास्तव 

हुसेनाबाद की रामलीला में राम-सुग्रीव मित्रता से लंका दहन तक जीवंत हुई रामकथा


राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध, सीता हरण और हनुमान के पराक्रम का हुआ भावपूर्ण मंचन, श्रद्धा और भक्ति में डूबे दर्शक


जौनपुर। हुसेनाबाद में शनिवार की रात रामभक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामलीला समिति हुसेनाबाद के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता, बाली वध, नककटैया, सीता हरण और लंका दहन के प्रसंगों का सजीव एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। स्थानीय कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवादों और शानदार प्रस्तुतियों से रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया। जैसे-जैसे लीला आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे पूरा वातावरण प्रभु श्रीराम की भक्ति और जयकारों से गुंजायमान होता रहा। श्रद्धालु रामकथा के प्रसंगों में भावविभोर होकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों का स्मरण करते नजर आए।


रामलीला का शुभारंभ भगवान श्रीराम की महिमा और उनके आदर्शों के स्मरण के साथ हुआ। राम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंग में भगवान श्रीराम और सुग्रीव के बीच विश्वास, सहयोग तथा मित्र धर्म की सुंदर झलक देखने को मिली। विपरीत परिस्थितियों में एक-दूसरे का साथ निभाने का संदेश देने वाले इस प्रसंग ने दर्शकों को मित्रता के वास्तविक अर्थ से परिचित कराया। इसके बाद बाली वध की लीला का मंचन हुआ, जिसमें कलाकारों ने अपने अभिनय से कथा के घटनाक्रम को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया। धर्म, न्याय और वचनबद्धता से जुड़े इस प्रसंग ने दर्शकों को रामायण के आदर्शों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।


इसके बाद नककटैया की लीला ने मंच पर उत्साह और रोमांच का वातावरण बना दिया। सूर्पणखा के प्रसंग में कलाकारों ने अपने संवाद और अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद मारीच के स्वर्ण मृग का रूप धारण करने और भगवान श्रीराम को वन में दूर ले जाने के प्रसंग के माध्यम से सीता हरण की कथा को आगे बढ़ाया गया। साधु के वेश में आए रावण द्वारा माता सीता का हरण किए जाने का दृश्य देखकर दर्शक रामायण के इस महत्वपूर्ण प्रसंग में भावनात्मक रूप से जुड़ गए। इस दृश्य ने छल, अधर्म और अहंकार के दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।


रामलीला का सबसे रोमांचक और भक्तिमय दृश्य लंका दहन का रहा। माता सीता की खोज में लंका पहुंचे पवनपुत्र हनुमान के पराक्रम, बुद्धिमत्ता और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण को कलाकार ने शानदार ढंग से मंच पर उतारा। हनुमान के जयकारों और लंका दहन के दृश्य के दौरान दर्शकों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। पूरा वातावरण जय श्रीराम और जय बजरंगबली के उद्घोष से भक्तिमय हो उठा। हनुमान जी की भक्ति और वीरता ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि सच्ची निष्ठा, साहस और प्रभु के प्रति समर्पण से बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है।


रामलीला में भगवान श्रीराम की भूमिका प्रवीण श्रीवास्तव, लक्ष्मण की भूमिका शिवा श्रीवास्तव तथा माता सीता का मोलू सोनकर, सूर्पणखा की भूमिका राज रावत, खर-दूषण की भूमिका राजेश यादव, मारीच की भूमिका दीपक श्रीवास्तव, साधु रूपी रावण की भूमिका दीपक मिश्रा, हनुमान की भूमिका अजय तिवारी, रावण की भूमिका अभिनव मिश्रा, सुग्रीव की भूमिका वेद मिश्रा, बाली की भूमिका शिवांग मिश्रा, ने संवादों, भाव-भंगिमाओं और पात्रों के अनुरूप अभिनय के माध्यम से रामायण की कथा को दर्शकों के सामने सजीव कर दिया।


हुसेनाबाद की रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। 80 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की मर्यादा, लक्ष्मण की सेवा भावना और हनुमान जी की अनन्य भक्ति से परिचित कराया जा रहा है। रामलीला का प्रत्येक प्रसंग यह संदेश देता है कि जीवन में सत्य, धर्म, प्रेम और कर्तव्य का मार्ग ही सर्वोत्तम है तथा अंततः अधर्म और अहंकार पर धर्म की विजय निश्चित है।

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सोने के रथ पर सवार होकर निकलेंगी मां दुर्गा, गीतांजलि संस्था निकालेगी शोभायात्रा

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दीपक श्रीवास्तव 

सोने के रथ पर सवार होकर निकलेंगी मां दुर्गा, गीतांजलि संस्था निकालेगी शोभायात्रा

स्वर्ण जयंती उत्सव के अवसर पर फाइन गोल्ड 999.9 से बने रथ पर विराजेंगी मां भगवती

जौनपुर। नगर की प्रतिष्ठित सामाजिक एवं पारिवारिक संस्था गीतांजलि इस बार शारदीय नवरात्र के अवसर पर अपने स्वर्ण जयंती उत्सव को विशेष रूप से मनाने जा रही है। विजयदशमी के दिन संस्था की ओर से मां भगवती की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें मां दुर्गा फाइन गोल्ड 999.9 से बने स्वर्ण रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करेंगी।

गीतांजलि परिवार अपनी आकर्षक सजावट और भव्य शोभायात्रा के लिए जाना जाता है। प्रत्येक वर्ष शोभायात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। मां के दर्शन के लिए श्रद्धालु रातभर जागकर शोभास्थल से लेकर विसर्जन घाट तक मौजूद रहते हैं। इस बार स्वर्ण जयंती उत्सव के उपलक्ष्य में शोभायात्रा को और विशेष बनाने के लिए संस्था ने मां भगवती को स्वर्ण रथ पर विराजमान कर निकालने का निर्णय लिया है।

संस्था अपने 54 वर्ष पूरे कर चुकी है और इस वर्ष शारदीय नवरात्र को स्वर्ण जयंती उत्सव के रूप में मना रही है। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। स्वर्ण रथ पर विराजमान मां भगवती की शोभायात्रा आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहने की उम्मीद है।

इस संबंध में गीतांजलि संस्था के संरक्षक मंडल और अध्यक्ष नीरज शाह ने जानकारी दी।

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ढालगर टोला में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के दर्शन कर रहे श्रद्धालु

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दीपक श्रीवास्तव 
ढालगर टोला में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के दर्शन कर रहे श्रद्धालु
श्री सरस्वती बाल ज्ञान संस्था की आकर्षक झांकी बनी आकर्षण का केंद्र, 1998 में हुई थी स्थापना

जौनपुर, 18 अक्टूबर । शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित कर आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं। विभिन्न पूजा पंडालों में मां के नौ स्वरूपों का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। इसी क्रम में नगर के ढालगर टोला स्थित श्री सरस्वती बाल ज्ञान संस्था की ओर से सजाई गई मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां मां के नौ स्वरूपों को प्रदर्शित किया गया है।
वर्ष 1998 में स्थापित श्री सरस्वती बाल ज्ञान संस्था कई वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन करती आ रही है। संस्था को श्री दुर्गा पूजा महासमिति की ओर से विभिन्न अवसरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। संस्था के पदाधिकारी हर वर्ष कुछ नया और बेहतर करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक आयोजन के साथ आकर्षक झांकियों और शोभायात्रा में संस्था की सक्रिय भागीदारी रही है।
संस्था के संस्थापक सदस्यों में अमरदीप दुबे, रामकृपाल जायसवाल, मनीष राय, राजकुमार जायसवाल और राजमन यादव शामिल हैं। वर्तमान में अभिषेक सोनी अध्यक्ष, प्रिंस तनेजा महामंत्री, सुखदेव गोस्वामी उपाध्यक्ष, प्रियांशु जायसवाल कोषाध्यक्ष और हर्षित जायसवाल विसर्जन प्रभारी हैं।

संस्था ने शोभायात्रा और झांकी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2008 और 2010 में शोभायात्रा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2023 में रजत जयंती वर्ष के अवसर पर शोभायात्रा में प्रथम और झांकी में द्वितीय स्थान हासिल किया। वहीं, वर्ष 2025 में शोभायात्रा में तृतीय स्थान प्राप्त किया।

नवरात्र के अवसर पर संस्था की ओर से सजाई गई मां दुर्गा की प्रतिमा और नौ स्वरूपों की झांकी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण बनी हुई है।

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श्रीराम कथा और कलश यात्रा की तैयारियों को लेकर समन्वय बैठक, 20 अक्टूबर को निकलेगी शोभायात्रा

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दीपक श्रीवास्तव 
श्रीराम कथा और कलश यात्रा की तैयारियों को लेकर समन्वय बैठक, 20 अक्टूबर को निकलेगी शोभायात्रा
ज्ञानप्रकाश सिंह ने जनपदवासियों से श्रीराम कथा में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की

जौनपुर, 18 अक्टूबर । बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में 21 से 29 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली नौ दिवसीय श्रीराम कथा और 20 अक्टूबर को प्रस्तावित भव्य कलश यात्रा की तैयारियों को लेकर शनिवार को उत्सव मोटल के बैंक्वेट हॉल में श्रीराम कथा संचालन समिति की समन्वय बैठक हुई। इसमें आयोजन की व्यवस्थाओं, सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और कलश यात्रा के मार्ग पर विस्तार से चर्चा की गई।
सेवा भारती, जौनपुर, काशी प्रांत के तत्वावधान में आयोजित बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी प्रांत के प्रांत कार्यवाह मुरली पाल ने की। बैठक में आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए कार्यकर्ताओं के बीच दायित्वों का विभाजन किया गया। साथ ही विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर कार्ययोजना तैयार की गई। उपस्थित सदस्यों ने आपसी समन्वय और सामूहिक सहभागिता के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया।

मुख्य आयोजक भाजपा नेता ज्ञानप्रकाश सिंह ने कहा कि श्रीराम कथा और भव्य कलश यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के समन्वित प्रयास से कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने जनपदवासियों से श्रीराम कथा में सहभागी बनकर आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की।

उन्होंने बताया कि 20 अक्टूबर को भव्य कलश एवं शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद 21 से 29 अक्टूबर तक बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में आचार्य शांतनु जी महाराज के श्रीमुख से नौ दिवसीय श्रीराम कथा का वाचन होगा।

बैठक का संचालन सेवा भारती के विभाग प्रमुख डॉ. तेज सिंह ने किया। इस अवसर पर सेवा भारती के जिलाध्यक्ष अनिल गुप्ता, ब्रम्हेश शुक्ल, विमल सिंह, सुरेश सिंह, डॉ. संजय पाण्डेय, जयेश सिंह, प्रदीप सिंह रिंकू, बबलू दूबे, मिंटू पाठक, मयंक नारायण, नारायण चौरसिया, विनय सिंह, आनंद सिंह, मनोज शुक्ल, जेपी श्रीवास्तव, ऋचा सिंह, मीना यादव, रिंकी श्रीवास्तव, राखी सिंह, नमिता सिंह, रूबी मिश्रा, नेहा सिंह, रेखा त्रिपाठी, उर्वशी सिंह, रेनू पाठक, डॉ. अंजना श्रीवास्तव, डॉ. अंजना सिंह, रूपम शुक्ला, निशि सोनकर, रजनी साहू, मीरा अग्रहरी, मिलन श्रीवास्तव और प्रांजल पटेल सहित विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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सम्पूर्ण समाधान दिवस की बैठक में सी आर ओ ने सुनी लोगों फरियाद

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दीपक श्रीवास्तव 
सम्पूर्ण समाधान दिवस की बैठक में सी आर ओ ने सुनी लोगों फरियाद
मातहतों को दिया समय से प्रार्थनापत्रों के निस्तारण करने का निर्देश

जौनपुर। केराकत तहसील अंतर्गत मुख्य राजस्व अधिकारी अजय कुमार अम्बष्ट ने केराकत तहसील के सभागार में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस की बैठक  में मातहतों को निर्देश दिया कि सभी प्रार्थनापत्रों का निस्तारण  समय से  गुणवत्तापूर्ण कराना सुनिश्चित  करें। उन्होनें कहा कि किसी तरह की उदासीनता व लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। इसअवसर पर पड़े 78 प्रार्थनापत्रों में से 14  का निस्तारण कर दिया गया। शेष  64 प्रार्थनापत्रों को संबंधित  अधिकारियों को यथाशीघ्र निस्तारण  करने हेतु निर्देशित किया। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी अखिलेश कुमार सिंह,सी ओ केराकत गिरेन्द्र सिंह,तहसीलदार व नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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