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प्रेम और निष्काम भक्ति से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव : पं. रजनीकांत द्विवेदी

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दीपक श्रीवास्तव 


प्रेम और निष्काम भक्ति से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव : पं. रजनीकांत द्विवेदी

श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश

जौनपुर, 28 अक्टूबर । नगर के विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन बुधवार को कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, गोवर्धन पूजा, गोपियों के अनन्य प्रेम और माता-पिता के वात्सल्य का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रेम, समर्पण और निष्काम भक्ति ही परमात्मा की प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है। जिस व्यक्ति के जीवन में परमात्मा के प्रति सच्ची भक्ति जागृत हो जाती है, उसका जीवन धन्य हो जाता है।


गोवर्धन पूजा के प्रसंग की व्याख्या करते हुए कथाव्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से प्रकृति के महत्व और उसके संरक्षण का संदेश दिया। प्रकृति मनुष्य को जीवन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराती है। ऐसे में उसका संरक्षण करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। प्रकृति का अनियंत्रित दोहन भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है। मनुष्य को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव रखते हुए संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।

भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के प्रेम का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि गोपियों की भक्ति निस्वार्थ और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। उनके प्रेम में किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं था। गोपी भाव को समझने के लिए बाहरी दृष्टि के बजाय अंत:करण से चिंतन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति का नाम राधा है। मनुष्य जिस प्रवृत्ति और विचारधारा के प्रभाव में रहता है, उसका जीवन भी उसी दिशा में आगे बढ़ता है। मन की चंचलता पर नियंत्रण रखकर उसे परमात्मा की भक्ति में लगाना चाहिए।

पं. द्विवेदी ने माता-पिता के प्रेम की व्याख्या करते हुए कहा कि पिता अपने पुत्र को सफल देखना चाहता है और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है। वहीं मां का वात्सल्य ममता और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है। सच्चे प्रेम में स्वार्थ और लाभ-हानि की अपेक्षा नहीं होती। इसी प्रकार परमात्मा की प्राप्ति भी अहंकार और स्वार्थ का त्याग कर प्रेम एवं समर्पण के मार्ग पर चलने से होती है।उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रेम, सदाचार, प्रकृति संरक्षण और निष्काम भक्ति को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कथा की मुख्य यजमान विमला सेठ हैं।

इस अवसर पर राजेंद्र सिंह, सेवा भारती के विभागाध्यक्ष डॉ. तेज सिंह, डॉ. बीएस उपाध्याय, गंगाधर शुक्ल, चंद्रप्रकाश सोनी, ओमजी सहाय, नीरज शाह, पूनम तिवारी, निर्मला राय, गीता शुक्ला, विवेक सेठ, विनीत सेठ, अर्चना सेठ, विशाल सेठ, विपिन सेठ, उज्ज्वल सेठ, ओम सेठ, वंशिका सेठ, चंद कुमार सेठ, राजाराम त्रिपाठी, हर्षित सेठ और हार्दिक सेठ सहित गठना कोठी परिवार के सदस्य एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व : पं. रजनीकांत द्विवेदी

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दीपक श्रीवास्तव 
जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व : पं. रजनीकांत द्विवेदी

श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन हनुमान महिमा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और पुतना प्रसंग का हुआ वर्णन


जौनपुर। नगर के विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने हनुमान महिमा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और पुतना वध के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सत्संग का प्रभाव इतना गहरा होता है कि मनुष्य का पूरा जीवन बदल सकता है। सत्संग के सामने संसार के सुख और वैभव का कोई विशेष महत्व नहीं है। मनुष्य के जीवन की वास्तविक सार्थकता परमात्मा के भजन, संकीर्तन और उनकी कथा के श्रवण में है। हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने बताया कि प्रभु श्रीराम की कथा के प्रति उनकी भक्ति और समर्पण अद्वितीय था। उन्होंने प्रसंग सुनाया कि जब प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी से अपने साथ चलने के लिए कहा, तो हनुमान जी ने पूछा कि क्या वहां भी प्रभु की कथा सुनने को मिलेगी। जब उन्हें बताया गया कि कथा का श्रवण धरती पर ही संभव होगा, तो उन्होंने साकेत धाम जाने के बजाय यहीं रहने का निर्णय लिया। पं. द्विवेदी ने कहा कि हनुमान जी भगवान श्रीराम की कथा में इतने लीन रहते थे कि उनके लिए कथा श्रवण ही सबसे बड़ा सुख था। उन्होंने सच्चे सेवक के रूप में प्रभु की सेवा की और अपने आचरण से समर्पण, निष्ठा तथा भक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया। मनुष्य को हनुमान जी के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा के भजन और संकीर्तन से दूर रहता है, वह अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अवसर से वंचित रह जाता है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए कथाव्यास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से नंद बाबा और माता यशोदा के घर आनंद छा गया। नंद बाबा ने 108 ब्राह्मणों को आमंत्रित कर अपने घर में पाठ कराया। भगवान के जन्म की खुशी में उन्होंने खुले मन से दान-पुण्य किया। जो भी उनके घर पहुंचा, उसे वस्त्र और आभूषण भेंट किए गए। उन्होंने सवा लाख गायों का गोदान कराया। कथाव्यास ने कहा कि नंद बाबा का आनंद और उत्साह देखते ही बनता था। भगवान श्रीकृष्ण का पालन-पोषण करने का सौभाग्य माता यशोदा को मिला, जो उनके पुण्य प्रताप का फल था। उन्होंने ब्रजमंडल की महिमा बताते हुए कहा कि ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा का धार्मिक महत्व है। श्रद्धा और विश्वास के साथ ब्रज की परिक्रमा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि कंस को जब यह सूचना मिली कि जिस बालक से उसे भय था, उसका जन्म हो चुका है, तो वह चिंतित हो उठा। कंस ने उस बालक को मारने के लिए अनेक प्रयास किए और इसी क्रम में पुतना को भेजा।
पुतना के प्रसंग का वर्णन करते हुए पं. रजनीकांत द्विवेदी ने बताया कि पुतना ने कंस को आश्वासन दिया था कि वह उसकी मनोकामना पूरी कर देगी। इसके लिए उसने अपना स्वरूप बदलने की बात कही। कथा के अनुसार, पुतना ब्रज पहुंची और अनेक शिशुओं को मारने के बाद महल में प्रवेश किया। उसने अपने स्तनों पर विष का लेप किया और भगवान श्रीकृष्ण को अपने पास लेकर उन्हें विषपान कराने का प्रयास किया।
इस प्रसंग की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कथाव्यास ने कहा कि पुतना का अर्थ अविद्या है। जहां अविद्या का वास होता है, वहां विवेक का अभाव मनुष्य को संकट में डाल सकता है। इसलिए जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व है। मनुष्य को सही और गलत के बीच अंतर समझते हुए अपने जीवन में सदाचार और भक्ति को स्थान देना चाहिए। कथा के दौरान श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और अन्य प्रसंगों को सुनकर भावविभोर हुए। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की मुख्य यजमान श्रीमती विमला सेठ हैं। इस अवसर पर मनोज पाण्डेय, राकेश कुमार सिंह, सोनी, सुनील मिश्र, आचार्य सूरत तिवारी, संतोष कुमार जी, नीलम, किरण सेठ, रेखा सेठ, बबली सेठ, अर्चना, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ समेत गठना कोठी परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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जौनपुर में KISNA के एक्सक्लूसिव शोरूम का शुभारंभ, देश में 177 हुई आउटलेट की संख्या

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दीपक श्रीवास्तव 

जौनपुर में KISNA के एक्सक्लूसिव शोरूम का शुभारंभ, देश में 177 हुई आउटलेट की संख्या


राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव की मौजूदगी में खुला शोरूम, यूपी में कंपनी का 33वां स्टोर

जौनपुर, 28 अक्टूबर । डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी ब्रांड KISNA ने उत्तर प्रदेश में अपने कारोबार का विस्तार करते हुए जौनपुर में एक्सक्लूसिव शोरूम का शुभारंभ किया। नगर के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित उमरपुर में खुले इस शोरूम का उद्घाटन हरि कृष्णा ग्रुप के संस्थापक घनश्याम ढोलकिया, सीईओ पराग शाह और प्रदेश सरकार के खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव की उपस्थिति में हुआ। यह उत्तर प्रदेश में कंपनी का 33वां और देश में 177वां एक्सक्लूसिव शोरूम है।

इस अवसर पर हरि कृष्णा ग्रुप के संस्थापक घनश्याम ढोलकिया ने कहा कि जौनपुर में नए शोरूम की शुरुआत उत्तर प्रदेश में कंपनी की उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दीपावली नई शुरुआत और पारिवारिक परंपराओं का पर्व है। कंपनी का प्रयास है कि इस त्योहारी सीजन में अधिक से अधिक परिवारों तक डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी की आकर्षक रेंज पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि कंपनी 'हर घर KISNA' के विजन के साथ देशभर में अपने कारोबार का विस्तार कर रही है।

कंपनी के सीईओ पराग शाह ने कहा कि जौनपुर में नया शोरूम स्थानीय ग्राहकों को डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी के विविध डिजाइनों के साथ बेहतर खरीदारी का अनुभव उपलब्ध कराएगा। कंपनी का उद्देश्य उत्कृष्ट कारीगरी और आकर्षक कलेक्शन के माध्यम से ग्राहकों की पसंद और जरूरतों को पूरा करना है।

शोरूम के साझेदार गोकुल अग्रवाल और किशन अग्रवाल ने कहा कि हरि कृष्णा ग्रुप की तीन दशक से अधिक की विरासत से जुड़े इस ब्रांड को जौनपुर लाना उनके लिए गर्व की बात है। शोरूम में ग्राहकों को विभिन्न अवसरों के अनुरूप डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी के आकर्षक डिजाइन उपलब्ध होंगे।

त्योहारी खरीदारी पर विशेष ऑफर

कंपनी की ओर से उद्घाटन के अवसर पर ग्राहकों के लिए विशेष ऑफर भी पेश किए गए हैं। इनमें डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज पर 100 प्रतिशत तक की छूट, पुराने सोने के बदले डायमंड ज्वेलरी की खरीद पर 105 प्रतिशत वैल्यू का लाभ और निर्धारित शर्तों के तहत डायमंड ज्वेलरी पर 90 प्रतिशत बायबैक तथा 95 प्रतिशत एक्सचेंज की सुविधा शामिल है। कंपनी ने 25 प्रतिशत डाउन पेमेंट पर डबल गोल्ड रेट प्रोटेक्शन और ग्रैंड लकी ड्रॉ के माध्यम से कार या स्कूटर जीतने का अवसर देने की भी घोषणा की है। इन ऑफरों पर नियम एवं शर्तें लागू होंगी।

कंपनी ने सामाजिक जिम्मेदारी के तहत स्वच्छ भारत अभियान के समर्थन में स्वच्छता अभियान भी आयोजित किया। वर्ष 2005 में स्थापित KISNA हरि कृष्णा ग्रुप का प्रमुख डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी ब्रांड है। कंपनी के अनुसार, देश के 28 राज्यों में इसके 1,500 से अधिक शॉप-इन-शॉप आउटलेट और 177 एक्सक्लूसिव शोरूम हैं।

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जौनपुर में 31 अक्टूबर को लगेगा वृहद परिवहन मेला, मौके पर होगा समस्याओं का निस्तारण

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दीपक श्रीवास्तव 
जौनपुर में 31 अक्टूबर को लगेगा वृहद परिवहन मेला, मौके पर होगा समस्याओं का निस्तारण
जौनपुर, 28 अक्टूबर । वाहन स्वामियों, चालकों और आम नागरिकों की परिवहन संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 31 अक्टूबर को जौनपुर के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) कार्यालय परिसर में एक दिवसीय वृहद परिवहन मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले में ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, फिटनेस, बकाया कर और अन्य विभागीय समस्याओं के समाधान के लिए विशेष काउंटर बनाए जाएंगे।

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) के अनुसार, परिवहन मेले का आयोजन शनिवार को सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक होगा। इसका उद्देश्य परिवहन विभाग की सेवाओं को पारदर्शी और सुलभ बनाने के साथ ही लंबित मामलों का मौके पर निस्तारण करना है।
मेले में लर्निंग एवं स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस, लाइसेंस नवीनीकरण, पता परिवर्तन और अन्य संशोधनों से संबंधित समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसके अलावा वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), वाहन पर ऋण संबंधी हाइपोथिकेशन दर्ज कराने या हटाने, फिटनेस प्रमाण पत्र और पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) से जुड़े मामलों में भी सहायता मिलेगी।

वाहनों के लंबित कर जमा करने और संबंधित त्रुटियों के निस्तारण की व्यवस्था भी की जाएगी। उत्तर प्रदेश मोटर यान कराधान नियमावली, 1998 के नियम 24 के तहत शास्ति में छूट का लाभ देते हुए पात्र मामलों में बकाया कर जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके साथ ही परिवहन विभाग से संबंधित शिकायतों और तकनीकी समस्याओं के लिए हेल्पडेस्क स्थापित की जाएगी। लोगों को यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा और सुरक्षित वाहन संचालन के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।

एआरटीओ प्रशासन ने जनपद के सभी वाहन स्वामियों, व्यावसायिक वाहन संचालकों, चालकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचकर परिवहन मेले का लाभ उठाएं।

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मानीकला रामलीला समिति ने भाजपा नेता कृष्ण कुमार जायसवाल को किया सम्मानित

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दीपक श्रीवास्तव 
मानीकला रामलीला समिति ने भाजपा नेता कृष्ण कुमार जायसवाल को किया सम्मानित 
राम के चरित्र से मिलती है 
 त्याग और समर्पण की प्रेरणा - इंजी कृष्ण कुमार जायसवाल

जौनपुर। मानीकला के पक्का पोखरा पर परम्परागत विजय दशमी मेले के मुख्य अतिथि इंजी कृष्ण कुमार जायसवाल मुन्नू ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान के चरित्र से हमें त्याग और समर्पण की प्रेरणा मिलती है। भगवान राम के आदर्शों पर चलकर ही राम राज्य की कल्पना की जा सकती है। 
मानीकला में विशाल पोखरे के एक तरफ ऊंचाई पर जहां भगवान राम माता सीता ,लक्ष्मण एवं वीर हनुमान जी के साथ विराजते हैं तो पोखरे के दूसरे तरफ रावण का विशाल पुतला स्थापित रहता है l पोखरे पर ही विशाल क्षेत्र पर तरह-तरह की दुकाने सजती हैं l 
   कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता इंजी. कृष्ण कुमार जायसवाल "मुन्नू"
द्वारा भगवान राम, लक्ष्मण , सीता एवं हनुमान जी को माल्यार्पण कर आशिर्वाद प्राप्त किया।  इस मौके पर रामलीला समिति के पदाधिकारियों द्वारा श्री मुन्नू का जोरदार स्वागत किया गया l स्वागत करने वालों में अध्यक्ष राम किसुन सोनकर ,उपाध्यक्ष संतोष सेठ, कोषाध्यक्ष  मनोज चौरसिया ,सुनील साहू, आदेश कश्यप, अशोक बेंनवंशी ,ज्ञान प्रकाश साहू, रमेश जायसवाल, शिवम जायसवाल, संदीप बिन्द ,फागुलाल चौरसिया, आनंद गुप्ता एवं संरक्षक  राजेश अग्रहरि प्रमुख  रहे l अंत मे मुख्य अतिथि श्री जायसवाल ने समिति के अध्यक्ष राम किसुन सोनकर का माल्यार्पण कर सम्मानित किया।
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कुश्ती में जौनपुर की बेटी आस्था आनंद सिंह ने स्टेट चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक

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दीपक श्रीवास्तव 
कुश्ती में जौनपुर की बेटी आस्था आनंद सिंह ने स्टेट चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक 

जौनपुर। गोरखपुर में आयोजित उत्तर प्रदेश सीनियर स्टेट चैंपियनशिप 2026 कुश्ती प्रतियोगिता में 65 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिभाग करते हुए जौनपुर की बेटी आस्था आनंद सिंह ने गोल्ड मेडल जीत लिया।आस्था आनंद सिंह गोल्ड मेडल प्राप्त कर उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने जा रही है ।  आस्था के गोल्ड मेडल मिलने पर जौनपुर में जश्न का माहौल रहा। आस्था के पिता आनंद सिंह पुलिस विभाग में कार्यरत हैं वहीं मां मेनका सिंह भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं। बेटी आस्था की सफलता पर शुभ चिंतकों ने घर पहुंच कर बधाई दी और बेटी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आस्था ने पहली बार सीनियर स्टेट चैंपियन शिप में प्रतिभाग कर यह सफलता अर्जित की।
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जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व : पं. रजनीकांत द्विवेदी

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दीपक श्रीवास्तव 
जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व : पं. रजनीकांत द्विवेदी
श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन हनुमान महिमा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और पुतना प्रसंग का हुआ वर्णन

जौनपुर। नगर के विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने हनुमान महिमा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और पुतना वध के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सत्संग का प्रभाव इतना गहरा होता है कि मनुष्य का पूरा जीवन बदल सकता है। सत्संग के सामने संसार के सुख और वैभव का कोई विशेष महत्व नहीं है। मनुष्य के जीवन की वास्तविक सार्थकता परमात्मा के भजन, संकीर्तन और उनकी कथा के श्रवण में है। हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने बताया कि प्रभु श्रीराम की कथा के प्रति उनकी भक्ति और समर्पण अद्वितीय था। उन्होंने प्रसंग सुनाया कि जब प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी से अपने साथ चलने के लिए कहा, तो हनुमान जी ने पूछा कि क्या वहां भी प्रभु की कथा सुनने को मिलेगी। जब उन्हें बताया गया कि कथा का श्रवण धरती पर ही संभव होगा, तो उन्होंने साकेत धाम जाने के बजाय यहीं रहने का निर्णय लिया। पं. द्विवेदी ने कहा कि हनुमान जी भगवान श्रीराम की कथा में इतने लीन रहते थे कि उनके लिए कथा श्रवण ही सबसे बड़ा सुख था। उन्होंने सच्चे सेवक के रूप में प्रभु की सेवा की और अपने आचरण से समर्पण, निष्ठा तथा भक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया। मनुष्य को हनुमान जी के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा के भजन और संकीर्तन से दूर रहता है, वह अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अवसर से वंचित रह जाता है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए कथाव्यास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से नंद बाबा और माता यशोदा के घर आनंद छा गया। नंद बाबा ने 108 ब्राह्मणों को आमंत्रित कर अपने घर में पाठ कराया। भगवान के जन्म की खुशी में उन्होंने खुले मन से दान-पुण्य किया। जो भी उनके घर पहुंचा, उसे वस्त्र और आभूषण भेंट किए गए। उन्होंने सवा लाख गायों का गोदान कराया। कथाव्यास ने कहा कि नंद बाबा का आनंद और उत्साह देखते ही बनता था। भगवान श्रीकृष्ण का पालन-पोषण करने का सौभाग्य माता यशोदा को मिला, जो उनके पुण्य प्रताप का फल था। उन्होंने ब्रजमंडल की महिमा बताते हुए कहा कि ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा का धार्मिक महत्व है। श्रद्धा और विश्वास के साथ ब्रज की परिक्रमा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि कंस को जब यह सूचना मिली कि जिस बालक से उसे भय था, उसका जन्म हो चुका है, तो वह चिंतित हो उठा। कंस ने उस बालक को मारने के लिए अनेक प्रयास किए और इसी क्रम में पुतना को भेजा।
पुतना के प्रसंग का वर्णन करते हुए पं. रजनीकांत द्विवेदी ने बताया कि पुतना ने कंस को आश्वासन दिया था कि वह उसकी मनोकामना पूरी कर देगी। इसके लिए उसने अपना स्वरूप बदलने की बात कही। कथा के अनुसार, पुतना ब्रज पहुंची और अनेक शिशुओं को मारने के बाद महल में प्रवेश किया। उसने अपने स्तनों पर विष का लेप किया और भगवान श्रीकृष्ण को अपने पास लेकर उन्हें विषपान कराने का प्रयास किया।
इस प्रसंग की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कथाव्यास ने कहा कि पुतना का अर्थ अविद्या है। जहां अविद्या का वास होता है, वहां विवेक का अभाव मनुष्य को संकट में डाल सकता है। इसलिए जीवन में विवेक, सत्संग और आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष महत्व है। मनुष्य को सही और गलत के बीच अंतर समझते हुए अपने जीवन में सदाचार और भक्ति को स्थान देना चाहिए। कथा के दौरान श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और अन्य प्रसंगों को सुनकर भावविभोर हुए। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की मुख्य यजमान श्रीमती विमला सेठ हैं। इस अवसर पर मनोज पाण्डेय, राकेश कुमार सिंह, सोनी, सुनील मिश्र, आचार्य सूरत तिवारी, संतोष कुमार जी, नीलम, किरण सेठ, रेखा सेठ, बबली सेठ, अर्चना, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ समेत गठना कोठी परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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