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20 मई को बंद रहेंगी दवा दुकानें, केमिस्ट्स एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन

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दीपक श्रीवास्तव 
20 मई को बंद रहेंगी दवा दुकानें, केमिस्ट्स एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन
ऑनलाइन दवा बिक्री और भारी डिस्काउंट के विरोध में देशव्यापी बंद का समर्थन


जौनपुर। केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन जौनपुर ने अखिल भारतीय संस्था एआईओसीडी (ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स) के आह्वान पर 20 मई को प्रस्तावित देशव्यापी दवा दुकान बंदी के संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। कलेक्ट्रेट परिसर में सिटी मजिस्ट्रेट को बंदी की सूचना एवं मांगों से संबंधित पत्रक दिया गया।
प्रदेश अध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष दिवाकर सिंह के नेतृत्व में महामंत्री बंशीधर मौर्य, कोषाध्यक्ष श्याम सिंह, चेयरमैन शकील अहमद, कार्यवाहक अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह, कार्यवाहक महामंत्री अखिलेश श्रीवास्तव, ऑडिटर सुनील गुप्ता तथा मीडिया प्रभारी अखिलेश प्रजापति मौजूद रहे। संस्था की ओर से औषधि निरीक्षक रजत पाण्डेय को भी बंदी की सूचना से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया।
पत्रकारों से बातचीत में दिवाकर सिंह ने बताया कि देशभर के 12 लाख से अधिक दवा व्यवसायी 20 मई को अपनी दुकानें बंद रखेंगे। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर रोक लगनी चाहिए, क्योंकि ड्रग एक्ट के अनुसार दवाओं की बिक्री केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट द्वारा ही की जानी चाहिए, जबकि ऑनलाइन कंपनियां इसका पालन नहीं कर रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नारकोटिक्स, शेड्यूल H1, हैबिट मेकिंग और नकली दवाओं की बिक्री हो रही है, जो आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही है। साथ ही बाजार में नकली दवाओं की रोकथाम के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं होने पर भी चिंता जताई गई।
दिवाकर सिंह ने कहा कि कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट से बाजार में असमानता बढ़ रही है, जिससे छोटे दवा व्यापारी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे डिस्काउंट नकली दवाओं के कारोबार को भी बढ़ावा देते हैं, जिसका संगठन विरोध करता है।
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गौ रक्षा पर बड़ा आंदोलन छेड़ेगा हिंदुस्तान यूनाइटेड मोर्चा

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दीपक श्रीवास्तव 
गौ रक्षा पर बड़ा आंदोलन छेड़ेगा हिंदुस्तान यूनाइटेड मोर्चा

शंकराचार्य के स्वागत के साथ सरकार को सौंपा जाएगा छह सूत्रीय ज्ञापन

जौनपुर, 13 मई। यूपी के जौनपुर में हिंदुस्तान यूनाइटेड मोर्चा ने गौ रक्षा के मुद्दे पर बड़ा और निर्णायक आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया। संगठन के अध्यक्ष आरिफ खान और उपाध्यक्ष शहनवाज मंजूर ने बुधवार को एक होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अब यह मुद्दा केवल अपील तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनभागीदारी के साथ सड़कों पर संघर्ष किया जाएगा।
अध्यक्ष आरिफ खान ने कहा कि गौ रक्षा इंसानियत, करुणा और साझा विरासत का प्रतीक है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो संगठन पूरे प्रदेश में व्यापक जनआंदोलन करेगा। उन्होंने मुस्लिम समाज से भी आगे आकर गौ संरक्षण के समर्थन की अपील की।
उपाध्यक्ष शहनवाज मंजूर ने पश्चिम बंगाल और असम सरकार पर निशाना साधते हुए गौ हत्या और मांस सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकारें कार्रवाई नहीं करती हैं तो उनकी मंशा पर सवाल उठेंगे।साथ ही उन्होंने कहा 15 मई को दोपहर दो बजे सिपाह चौराहे पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आगमन पर संगठन की ओर से उनका स्वागत किया जाएगा। साथ ही उनके माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार को छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा जाएगा।
ज्ञापन में गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने हेतु केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने, उत्तर प्रदेश में ‘राजकीय माता’ का दर्जा देने, गौशालाओं में सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य करने, प्रत्येक जिले में आधुनिक गो-चिकित्सालय स्थापित करने, घायल गायों के लिए एम्बुलेंस सेवा शुरू करने तथा मृत गायों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सरकारी नीति बनाने जैसी मांगें शामिल हैं।
अंत में दोनों नेताओं ने कहा कि यह जनभावनाओं से जुड़ा आंदोलन है और इसे हर हाल में अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

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पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव को न्याय दिलाने तक जारी रहेगा संघर्ष

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दीपक श्रीवास्तव 
पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव को न्याय दिलाने तक जारी रहेगा संघर्ष
दूसरी पुण्यतिथि पर नम आंखों से दी गई श्रद्धांजलि, पत्रकारों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
जौनपुर। शहीद पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव की दूसरी पुण्यतिथि पर बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित पत्रकार भवन में इलेक्ट्रॉनिक एंड डिजिटल मीडिया एसोसिएशन की ओर से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में जिले भर से जुटे पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव के हत्यारों को सजा मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
श्रद्धांजलि सभा में मौजूद पत्रकारों की आंखें नम हो गईं। वक्ताओं ने कहा कि आशुतोष श्रीवास्तव की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला था। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार सुरक्षित नहीं रहेगा तो समाज की आवाज भी दब जाएगी।
जौनपुर पत्रकार संघ के अध्यक्ष शशिमोहन सिंह “क्षेम” तथा ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संजय अस्थाना ने दो वर्ष बीत जाने के बावजूद मामले में ठोस कार्रवाई न होने पर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई को और तेज किया जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक एंड डिजिटल मीडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सिंह, अब्दुल हक अंसारी तथा संपादक मंडल के संरक्षक रामजी जायसवाल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाज को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाने वाला पत्रकार आज स्वयं न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है।
शहीद पत्रकार के बड़े भाई संतोष श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि विवेचना में शुरू से ही लापरवाही बरती गई। उन्होंने कहा कि मुख्य अभियुक्त नासिर जमाल का नाम विवेचना के दौरान निकाल दिया गया, जिससे पीड़ित परिवार के मन में गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने मामले की पुनः निष्पक्ष विवेचना कराने की मांग दोहराई।
सभा में तेलंगाना से आए पत्रकार अजय कुमार शुक्ला ने कहा कि पत्रकार के परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। उपस्थित पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो पत्रकार संगठन आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
ज्ञात हो कि 13 मई 2024 को शाहगंज थाना क्षेत्र के इमरानगंज बाजार में बाइक सवार बदमाशों ने सबरहद गांव निवासी पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद पूरे जिले में भारी आक्रोश फैल गया था। मामले में संतोष श्रीवास्तव की तहरीर पर नासिर जमाल, कामरान उर्फ अर्फी, मोहम्मद हाशिम और जमीरुद्दीन के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था।
कार्यक्रम में राजकुमार सिंह, शशिराज सिन्हा, जावेद अहमद, आदित्य भारद्वाज, विश्व प्रकाश श्रीवास्तव, दीपक मिश्रा, नितिश कुमार “राहुल”, अजीत बादल चक्रवर्ती, प्रोफेसर आसाराम यादव, वीरेंद्र पाण्डेय, रोहित चौबे, तबरेज नियाजी, शिवेंद्र सिंह “काजू”फूलचंद यादव और आनंद सिंहसहित बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह ने किया, जबकि अंत में महामंत्री दीपक मिश्रा ने आभार व्यक्त किया।
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बहराइच के बाद खेतासराय के गाजीमियां के मेले पर लगा प्रतिबंध

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दीपक श्रीवास्तव/इन्द्रजीत सिंह मौर्य 
बहराइच के बाद खेतासराय के गाजीमियां के मेले  पर लगा प्रतिबंध

खेतासराय में 14 मई को प्रस्तावित था आक्रमणकारी सैयद सालार मसूद गाजी मियां का मेला


मेला क्षेत्र में पुलिस प्रशासन ने बैठाया पहरा, भागे-भागे फिर रहे मुजावर और दफाली

मुख्यमंत्री के कड़े तेवर के बाद  हरकत में आए जौनपुर पुलिस प्रशासन

जौनपुर। यूपी के संभल और बहराइच में सालार मसूद गाजी मियां की याद में लगने वाले मेले पर प्रदेश शासन द्वारा कड़े प्रतिबंध लगा दिए जाने के बाद से जौनपुर पुलिस भी हरकत में आ गई है।
जिले के खेतासराय कस्बे में हजारों लोगों के बीच इसी 14 मई को लगने वाले गाजी मियां के इस मेले पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। 
मेला क्षेत्र में कोई झूला , सर्कस, चरखी, चिड़ियाघर, छोटे बड़े चलते फिरते अस्थाई शोरूम दुकानदार न आए इसके लिए खेतासराय पुलिस निरंतर 24 घंटे निगरानी कर रही है।
पुलिस कि सख्त पहरे के चलते मेला लगाने वाले मुजावर और दफाली उल्टे पैर भागे-भागे फिर रहे हैं। अंधविश्वास के नाम पर सीधे-साधे लोगों को बहला फुसलाकर हजारों का वारा न्यारा करने वाले ये तथाकथित मुजावर मेले को लेकर एकदम चुप्पी साथ लिए हैं।
बहराइच जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के  बाद से जौनपुर जिला प्रशासन और एलआई यू के अधिकारी   इस पूरे मामले में बेहद ही सक्रिय हो गए हैं।
अधिकारियों की टीम मेला लगवाने वाले मुजावर और दफाली की खोजबीन में जुट गए हैं। पुलिस के ख़ौफ के चलते वह न तो किसी प्रकार का बयान देना चाहते हैं। ना ही प्रशासन के सामने आने की हिम्मत जुटा रहे हैं।

सूबे की सियासत में सुर्खियों पर आए संभल जिले में सैयद सालार मसूद गाजी की याद में लगने वाले मेले पर पिछली बार से ही प्रदेश शासन ने रोक लगा दिया । पुलिस ने मेला आयोजित करने पर मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी भी दी है। 
वहाँ के एएसपी ने कहा कि सालार मसूद गजनवी का सेनापति था, उसने लूटपाट और हत्याएं की थीं। इतिहास में इस बात का जिक्र है। 
लिहाजा पुलिस ने नेजा मेला लगाए जाने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। कहा है कि जिस सैयद सालार मसूद गाजी की याद में यह आयोजन किया जाता है वह मोहम्मद गजनवी का सेनापति था। उसकी याद में यह मेला उचित नहीं है।
पूर्वी यूपी के सियासी पृष्ठभूमि में जनपद जौनपुर का अपना खास मुकाम है। सैयद सालार मसूद गाजी मियां का मेला इसी जिले के नगर पंचायत खेतासराय क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष गुरुवार के दिन लगता है।
इस बार 14 मई को यह मेला प्रस्तावित था।
 मेले से सवा महीने पहले  मेले की लगन रखी जाती है।
 मेले का लगन रखने के लिए खेतासराय के  शुकरुल्ला दफाली, मोछू दफाली अपनी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हैं लेकिन इस बार गांव-गांव में खुले तौर पर प्रचार नहीं हुआ।
 फिलहाल चोरी छुपे गाजी मियां के निशान को लगाने का कार्य भी यह दफाली और उनके चेले चपाटे कर रहे हैं।
बुधवार को प्रतिनिधि ने मेला लगाए जाने के संबंध में उनसे जब बात की  तो उन्होंने कहा कि जब प्रदेश सरकार मेला लगाने की अनुमति नहीं दे रही है।
 तो हम भी इस बार किसी प्रकार किसी प्रकार का रिस्क नही लेंगे। दबी जुबान स्वीकार किया कि इस बार मेला नहीं लगेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर मेला क्षेत्र में कोई बाहर से पूजा पाठ फ़ातिया कराने के लिए आता है तो हम कैसे रोक सकते हैं।
वैसे गाजी मियां के इस मेले को हिंदू संप्रदाय के लोग राष्ट्रवीर सुहेलदेव विजय दिवस के रूप में मानते हैं।
उनका कहना है कि सैयद सालार मसूद गाजी से बहराइच जिले में जब 21 छोटे राज्यों के राजाओं के साथ हुई जंग में  वह मारा गया तो उस दिन को हम लोग विजय दिवस के रूप में मनाते हैं।
 मेले के नाम पर मुजावर  करते हैं वसूली

खेतासराय में लगने वाले  मेले में गाजी मियां की कनूरी कराने के लिए जो भी स्त्री पुरुष बूढ़े बच्चे आते हैं उनसे मिलने वाली रकम और चढ़ावे के रूप में अनाज, मुर्गा , मलीदा, नकदी व अन्य जो भी सामान मिलता है। मुजावर और दफाली उसे अपने घर लेकर चले जाते हैं। 
खेतासराय के फिरोज जोगी, अलाऊदीन जोगी, उजागिर जोगी, शुकरुल्लाह दफाली, मोछू दफाली  खुद स्वीकार करते हैं कि गाजी मियां के मेले से अच्छी खासी आए हो जाती है। गेहूं अनाज व अन्य सामानों को हम लोग बेंच देते हैं।  फिर बहराइच में जो कोई जाता है तो कुछ चंद रुपए चढ़ावे के नाम पर भेज  देते हैं।
गाजी मियां के नाम पर पूजा पाठ यानी कनूरी करने के लिए  लकड़ी के बनाए गए निशान पर 500, 200 से लेकर हजारों रुपये  की मन्नत को कपड़े में लपेटकर बांधा जाता है। 
 फिर मिट्टी के बर्तन में चने की दाल, बैगन, चावल और बाटी को बनाकर पहले उन्हें चढ़ाया जाता है।मुर्गा व अन्य जंतुओं की बलि भी दी जाती है।


मेले पर लगा कड़ा प्रतिबंध, नहीं लगेगा मेला

जौनपुर जिला मजिस्ट्रेट सैमुअल एन पाल ने शाहगंज तहसील प्रशासन को शासन की गाइडलाइन से अवगत कराते हुए निर्देशित कर दिया है कि खेतासराय में सैयद सालार मसूद गाजी मियां का कोई भी मेला  जो इसी 14 मई  को लगना था।  उस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस बार आक्रमणकारी गाजी मियां का मेला खेतासराय में नहीं लगेगा। इसके लिए खेतासराय थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह , कस्बा प्रभारी अनिल कुमार पाठक , तारीक अंसारी, उप निरीक्षक संजय पांडेय, कांस्टेबल आशुतोष तिवारी, अंबिका यादव, अभिमन्यु सिंह  भारी संख्या में महिला पुलिस बल के साथ  प्रत्येक दिन खुद निगरानी कर रहे हैं।

वही इस मामले में शाहगंज के डिप्टी एसपी गिरेन्द्र सिंह 
ने बताया कि शासन का सख्त निर्देश है कि सुरक्षा के  मद्देनजर देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी बढ़ गई है। पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मूड में है। लिहाजा सैयद सालार मसूद गाजी मियां का मेला इस बार नहीं लगेगा।
 बिना अनुमति के कोई भी मुजावर या अन्य कोई मेला लगाने वाले कमेटी और संस्था के लोग बिना अनुमति के कोई भी कार्य करेंगे तो उन्हें जेल भेजा जाएगा।
 इस मेले में पूर्वांचल के विभिन्न अंचलों से   हजारों की संख्या में लोग शामिल होने आते हैं।  इसे सैयद सालार मसूद गाजी मियां का मेला अथवा गुरखेत का मेला भी कहा जाता है ।
मेला क्षेत्र में अब काफी रिहायशी मकान, आबादी हो जाने से जगह कम है लिहाजा मेला खेतासराय  से शुरू होकर गोरारी बाजार तक तीन किलोमीटर के दायरे में  रहता है।
मेला शुरू होने से डेढ़ महीना पहले ही चिड़ियाघर, झूला, सर्कस, चरखी के साथ  तरबूज, खरबूज और मिठाई  के बड़े दुकानदार यहां आते हैं । वह लोग दो महीना पहले ही अपने लिए जमीन की बुकिंग कर लेते हैं।
 इस बार संभल में उठे विवाद और प्रदेश सरकार के सख्त रवैया के चलते जौनपुर जिला प्रशासन ने भी मेला लगाने की अनुमति नहीं दी।
इसके चलते पहले से ही कोई बुकिंग नहीं ली गई थी।
कुछ छोटे-मोटे दुकान दार भूल वश यहां आ गए थे। उन्हें पुलिस प्रशासन ने अच्छे से समझा दिया कि मेला लगने की अनुमति नहीं है। लिहाजा वह लोग भी अपना डेरा तंबू उठा कर चले गए।
कौन था सैयद सालार मसूद गाजी 
जौनपुर। इतिहास की किताबों में हुए जिक्र के मुताबिक
सैयद सालार मसूद गाजी लुटेरा और आक्रांता मोहम्मद गजनवी का भांजा था। मोहम्मद गजनबी ने मसूद गाजी को अपनी सेना की कमान सौंप रखी थी। हिंदू मंदिरों पर किए जा रहे आए दिन हमले लूटपाट में उसकी आक्रांता को देखते हुए उसे अपनी सेना का सेनापति भी बनाया था।
अगर सबसे क्रूर शासको की बात आती है तो उसमें सबसे पहला नाम मोहम्मद गजनवी का नाम आता है।
वह गजनी का रहने वाला था उसने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर हमला करके भारी लूटपाट करते हुए शिवलिंग को खंडिंत कर दिया था। मंदिर को भी काफी क्षतिग्रस्त कर दिया।
बहराइच में हुए भीषण युद्ध में महाराजा सुहेलदेव राजभर की सेना ने सालार मसूद गाजी को करारी शिकस्त दी। हार के साथ ही युद्ध में सालार मसूद गाजी को जान भी गंवानी पड़ी। इसके बाद उसकी सेना ने बहराइच में ही उसको दफना दिया। काफी समय के बाद दिल्ली के सुल्तानों के दौर में यहां मजार बनी और इसे दरगाह के रूप दे दिया गया।
महाराजा सुहेलदेव श्रावस्ती के एक महान राजा थे , जिन्हें 1034 में बहराइच में गजनवी सेनापति गाजी मियां को हराने और मारने के लिए जाना जाता है।
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महिला आरक्षण विरोध को लेकर भाजपा महिला मोर्चा का प्रदर्शन दूसरे दिन जारी

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दीपक श्रीवास्तव 
महिला आरक्षण विरोध को लेकर भाजपा महिला मोर्चा का  प्रदर्शन दूसरे दिन जारी

जौनपुर,12 मई । यूपी के जौनपुर में संसद में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विधेयक के विरोध को लेकर मंगलवार को भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने समाजवादी पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोहिया पार्क परिसर में आयोजित प्रदर्शन के दौरान महिला कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर सपा सांसद बाबू सिंह कुशवाहा और समाजवादी पार्टी के विरोध में नारेबाजी की।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रागिनी सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध कर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अपनी महिला विरोधी मानसिकता को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी आगामी चुनावों में इसका जवाब देगी और इसका असर वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।
जिला मंत्री अंशु कुशवाहा ने कहा कि केंद्र सरकार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से महिलाओं को उनका अधिकार और सम्मान देने का कार्य कर रही है। वहीं विपक्षी दल महिलाओं के अधिकारों का विरोध कर रहे हैं।
नीलम अग्रहरि ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाना चाहते थे, लेकिन विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि इसी विरोध के चलते महिला कार्यकर्ता धरना-प्रदर्शन कर रही हैं।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे गांव-गांव जाकर महिलाओं को उनके अधिकारों और सरकार की योजनाओं के प्रति जागरूक करेंगी।
इस अवसर पर विमला श्रीवास्तव, मिलन श्रीवास्तव, राखी सिंह, सुशीला सिंह, निशी सोनकर, पूनम, पूजा, शांति, मीता, मंगला, आशा, सुमन, सुभाना, लीलावती, विमला विंद, विमला मौर्य और रूपा अग्रहरि सहित बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।
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टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत पौष्टिक आहार किट वितरित, जागरूकता पर दिया गया जोर

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दीपक श्रीवास्तव 
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत पौष्टिक आहार किट वितरित, जागरूकता पर दिया गया जोर

जौनपुर,12 मई । यूपी के जौनपुर में सरजू प्रसाद शैक्षिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में मंगलवार को प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार किट वितरित की गई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य जागरूकता के साथ टीबी मरीजों को उपचार के प्रति प्रेरित किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. सुशील कुमार अग्रहरी ने पौष्टिक आहार किट वितरण के मेडिकल और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए टीबी मरीजों को “गोद लेने” की प्रक्रिया एवं उसके उद्देश्य को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से ही टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तेजी से पूरा किया जा सकता है।
एसटीएलएस राजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि टीबी मरीजों को अपना इलाज बीच में नहीं छोड़ना चाहिए और डीआर-टीबी मरीजों के परिवार के सदस्यों में लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य डॉ. सुभाष सिंह ने टीबी के प्रमुख लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि दो सप्ताह से अधिक खांसी, लगातार बुखार, बलगम में खून आना, वजन घटना, भूख कम लगना और रात में पसीना आना टीबी के लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसकी जांच नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर निशुल्क कराई जा सकती है।
संस्था अध्यक्ष एवं प्रधान अध्यापक प्रमोद कुमार प्रजापति ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि टीबी हवा के माध्यम से फैलने वाली बीमारी है। फेफड़ों की टीबी से पीड़ित व्यक्ति के खांसने या थूकने से जीवाणु हवा में फैलकर अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।
इस अवसर पर नवीन सिंह, प्रदीप सिंह, सोमरू राम प्रजापति, ठाकुर प्रसाद राय, सागर श्रीवास्तव, अतुल, धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव, बबलू, अमन श्रीवास्तव सहित अन्य लोग मौजूद रहे। अंत में पूर्व अध्यक्ष बाल न्यायालय संजय उपाध्याय ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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साइबर सेल की बड़ी कामयाबी 125 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद, मालिकों को लौटाए

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दीपक श्रीवास्तव 
साइबर सेल की बड़ी कामयाबी 125 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद, मालिकों को लौटाए 
जौनपुर,12 मई। यूपी जौनपुर की साइबर क्राइम सेल ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 125 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को वापस सौंप दिए। मंगलवार को पुलिस लाइन स्थित बहुउद्देश्यीय हाल में आयोजित कार्यक्रम में एसपी सिटी आयुष श्रीवास्तव ने मोबाइल धारकों को उनके फोन सौंपे। बरामद किए गए मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई जा रही है।इस मामले में जानकारी देते हुए एसपी सिटी ने बताया कि साइबर क्राइम टीम ने सीईआईआर पोर्टल की सहायता से इन मोबाइल फोनों को ट्रेस कर बरामद किया। उन्होंने कहा कि जिले में अब तक कुल 1640 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए जा चुके हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़ 28 लाख रुपये है।
बरामद किए गए मोबाइल फोन जौनपुर के विभिन्न थाना क्षेत्रों के अलावा उत्तर प्रदेश के कई जनपदों जैसे आजमगढ़, वाराणसी, सुल्तानपुर, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, बलिया, प्रतापगढ़ और भदोही से प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार और राजस्थान जैसे अन्य राज्यों से भी मोबाइल बरामद किए गए हैं।
मोबाइल कंपनियों में मुख्य रूप से वन प्लस, वीवो, रेडमी, ओप्पो, रियलमी, टेक्नो, पोको, नोकिया और सैमसंग के फोन शामिल रहे।
इस दौरान एसपी सिटी ने लोगों से अपील की कि मोबाइल फोन गुम होने पर तुरंत संबंधित थाने में गुमशुदगी दर्ज कराएं तथा सीईआईआर पोर्टल पर शिकायत करें। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता सबसे प्रभावी उपाय हैं। साथ ही किसी भी साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।

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