दीपक श्रीवास्तव
जौनपुर। विजयादशमी के पावन पर्व पर जौनपुर की ऐतिहासिक राजा हवेली में राज परिवार की परंपराओं के अनुरूप इस वर्ष भी शस्त्र पूजन का आयोजन विधि-विधान और राजसी परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। शस्त्र पूजन राजपुरोहित पंडित जनार्दन मिश्र के देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया गया।
राजा जौनपुर अवनींद्र दत्त के अस्वस्थ होने के कारण महाराज दरबार हॉल में उपस्थित नहीं हो सके। हालांकि उनकी अनुपस्थिति में भी राज परिवार की वर्षों पुरानी परंपराओं और निर्धारित रीति-रिवाजों का निर्वहन पूरी श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ किया गया।
शस्त्र पूजन के अवसर पर राजा हवेली में पारंपरिक राज दरबार भी लगाया गया। दरबार में शामिल दरबारी राजसी गणवेश एवं पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। इस दौरान जौनपुर राज्य की पुरानी परंपराओं के अनुरूप प्रतीकात्मक रूप से हवेली में नजराना अर्पित करने की रस्म भी निभाई गई। इस दौरान राजसी परंपरा, अनुशासन और ऐतिहासिक विरासत की झलक देखने को मिली।
शस्त्र पूजन एवं दरबार की रस्मों के बाद विजयादशमी के अवसर पर राजा पोखरे पर भव्य मेले का आयोजन हुआ। मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर उत्सव का आनंद लिया। यहां परंपरागत रूप से रावण दहन किया गया। इसके पश्चात राजा पोखरे पर राजपुरोहित पंडित जनार्दन मिश्र द्वारा शमी पूजन संपन्न कराया गया।
विजयादशमी के इस आयोजन में जौनपुर की ऐतिहासिक राजपरंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला। राजा हवेली में आयोजित कार्यक्रम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। शस्त्र पूजन से लेकर राज दरबार और राजा पोखरे पर आयोजित मेले तक पूरे आयोजन में पुरानी परंपराओं की जीवंत झलक दिखाई दी।
इस अवसर पर डॉ. शंभू राम चौहान प्राचार्य; सत्य राम प्रजापति, प्रबंधक; डॉ. संजय चौबे, प्रधानाचार्य; पूर्व प्राचार्य डॉ. अखिलेश्वर शुक्ल; संजय अस्थाना, श्याम सुंदर दुबे,ओम प्रकाश शाही; सुभाष चंद्र सिंह; पूर्व प्रमुख सुरेंद्र प्रताप सिंह; संत प्रसाद राय; अशोक मिश्रा; अशोक तिवारी; जियाराम यादव; आशा राम यादव; नन्हे सिंह; राज कुमार सिंह; रवि सिंह; लोलारक दुबे; प्रेम प्रकाश मिश्रा; आत्म प्रकाश यादव; डॉ. अजीत कपूर; दिनेश कपूर; आंवले यादव; अवनींद्र तिवारी सहित राज परिवार से जुड़े अनेक लोग मौजूद रहे।
आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों ने जौनपुर की ऐतिहासिक राजपरंपराओं को संरक्षित रखने तथा आने वाली पीढ़ियों तक इन परंपराओं को पहुंचाने के संकल्प को भी दोहराया। विजयादशमी का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ जौनपुर की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर सामने आया।
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