दीपक श्रीवास्तव
संजय सिंह की बड़ी घोषणा: गायब स्कूल खोजकर लाने वाले को ₹1 लाख का इनाम
जौनपुर। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घोषणा की है कि कागज़ों में दर्ज लेकिन धरातल से गायब विद्यालय को खोजकर सामने लाने वाले को ₹1 लाख का पुरस्कार दिया जाएगा।
इसी अभियान के तहत आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने डॉ. अनुराग मिश्रा, प्रांत प्रभारी पूर्वांचल प्रांत के नेतृत्व में जौनपुर नगर क्षेत्र में ऐसे विद्यालयों की तलाश शुरू की। पड़ताल में पांच ऐसे विद्यालय सामने आए, जिनके निर्धारित स्थान पर विद्यालय का भवन मौजूद नहीं मिला और वहां निजी भवन दिखाई दे रहे हैं।
इन विद्यालयों के नाम हैं—
1. प्राथमिक विद्यालय ढालगर टोला
2. प्राथमिक विद्यालय मिसिरपुर कन्या
3. कम्पोजिट विद्यालय गदनअर्जानी
4. प्राथमिक विद्यालय उर्दू बाजार
5. प्राथमिक विद्यालय बाग हासिम
डॉ. अनुराग मिश्र ने कहा कि अब तक “स्कूल चोरी” के जिन मामलों की चर्चा हुई, उनमें विद्यालय भवन धरातल पर मौजूद था, लेकिन ताला लगा था। जौनपुर के इन मामलों में सवाल उससे भी गंभीर है—विद्यालय का पूरा भवन ही अपने निर्धारित स्थान पर दिखाई नहीं दे रहा है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में विद्यालय मौजूद है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विद्यालय अपने मूल स्थान पर मौजूद ही नहीं है तो छात्र, शिक्षक और रसोइया किस स्थान पर दर्ज हैं? एमडीएम कहां बन रहा है और विद्यालय संचालन किस भवन में हो रहा है?
उन्होंने सक्षम अधिकारियों से मांग की कि विद्यालयों को मूल स्थान से हटाने अथवा किराये के भवन खाली कराने से संबंधित सक्षम अधिकारी का आदेश और पूरी पत्रावली सार्वजनिक की जाए।
डॉ. अनुराग मिश्र ने जौनपुर के सभी मीडिया बंधुओं और पत्रकार साथियों से विशेष अपील की कि वे इन विद्यालयों को अपने कैमरे के साथ खोजने निकलें।
उन्होंने कहा, “फाइलों पर भरोसा मत कीजिए—कैमरा लेकर मौके पर जाइए। देखिए स्कूल वहां है या सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में।”
उन्होंने कहा कि मीडिया यदि इन स्थानों की वास्तविक तस्वीर जनता के सामने रखेगा तो कागज और धरातल के बीच का अंतर स्वयं स्पष्ट हो जाएगा।
डॉ. मिश्र ने कहा, “संजय सिंह जी ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। अब जौनपुर भी इस चुनौती को स्वीकार करता है। हम स्कूल खोजने निकले हैं—मीडिया बंधु भी अपना कैमरा उस तरफ ले जाएं, जहां सरकारी रिकॉर्ड में स्कूल जिंदा है, लेकिन धरातल पर उसका भवन दिखाई नहीं देता।”
उन्होंने कहा कि कागजों में स्कूल नहीं, धरातल पर स्कूल चाहिए। फाइलों में बच्चे नहीं, स्कूल में बच्चे चाहिए। अब ‘स्कूल चोरी’ की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें