दीपक श्रीवास्तव
कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को नमन, पूर्व सैनिक संगठन ने वीर परिवारों का किया सम्मान
जौनपुर। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संगठन की ओर से रविवार को कचहरी रोड स्थित सैनिक कल्याण कार्यालय में 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। संगठन का यह चौथा कारगिल विजय दिवस समारोह रहा, जिसमें 1999 के कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
समारोह में कारगिल युद्ध के वीर जवानों के परिजनों को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने शहीदों के अद्वितीय साहस, त्याग और बलिदान को याद करते हुए कहा कि देश उनकी वीरता का सदैव ऋणी रहेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैप्टन अजीत पांडेय ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने विपरीत परिस्थितियों में भी अद्वितीय पराक्रम का परिचय देते हुए पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को खदेड़कर देश की एक-एक इंच भूमि को मुक्त कराया था।उन्होंने बताया कि शून्य से कई डिग्री नीचे तापमान, 16 से 18 हजार फीट की ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी और दुश्मन की लगातार गोलाबारी जैसी विषम परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सैनिकों ने टोलोलिंग, टाइगर हिल, प्वाइंट 5140, प्वाइंट 4875 और खालूबार रिज जैसी दुर्गम चोटियों पर विजय प्राप्त कर विश्व के सामने भारतीय सेना के अदम्य साहस का परिचय दिया।वक्ताओं ने कहा कि कारगिल युद्ध के बाद भारत ने रक्षा तैयारियों, खुफिया समन्वय, सीमा अवसंरचना और सैन्य आधुनिकीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क एवं सुरंग निर्माण, आधुनिक निगरानी प्रणाली और 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे कदमों से देश की सामरिक क्षमता और अधिक मजबूत हुई है।समारोह का समापन शहीदों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
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