दीपक श्रीवास्तव
अर्पित सर्वेश ने बढ़ाया प्रतापगढ़ मान, मिला 'अंतरराष्ट्रीय तेजस्वी सम्मान'
प्रतापगढ़।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित भव्य अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में प्रतापगढ़ जनपद के युवा साहित्यकार, कवि एवं लेखक अर्पित सर्वेश (अर्पित शुक्ला) को साहित्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान, निरंतर सृजनशीलता तथा युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने के उल्लेखनीय प्रयासों के लिए प्रतिष्ठित "अंतरराष्ट्रीय तेजस्वी सम्मान" से सम्मानित किया गया। राजधानी में मिला यह सम्मान न केवल अर्पित सर्वेश के लिए, बल्कि पूरे प्रतापगढ़ जनपद और उत्तर प्रदेश के नागरिकों के लिए गर्व और सम्मान का विषय माना जा रहा है।
मात्र 23 वर्ष की आयु में साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाले अर्पित सर्वेश आज देश के उभरते हुए युवा साहित्यकारों में अग्रणी माने जाते हैं। उन्होंने अब तक 33 पुस्तकों का लेखन किया है तथा 500 से अधिक कविताओं की रचना कर हिंदी और अंग्रेज़ी साहित्य को समृद्ध किया है। उनकी रचनाओं में प्रेम, दर्शन, समाज, राष्ट्र, मानवीय संवेदनाएँ और जीवन के विविध आयामों का प्रभावशाली चित्रण देखने को मिलता है।
प्रतापगढ़ की धरती से निकलकर उत्तर प्रदेश की राजधानी में अंतरराष्ट्रीय स्तर का सम्मान प्राप्त करना जनपद की साहित्यिक परंपरा और युवा प्रतिभा की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय साहित्यकारों, शिक्षाविदों और नागरिकों ने इसे पूरे जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि अर्पित सर्वेश की उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को साहित्य और सृजन की दिशा में प्रेरित करेगी।
अर्पित सर्वेश की साहित्यिक उपलब्धियाँ केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं हैं। उनकी अनेक रचनाएँ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही गई हैं और वे युवा लेखकों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं। साहित्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, निरंतर लेखन और नवाचार ने उन्हें कम समय में विशिष्ट पहचान दिलाई है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें समय-समय पर विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जाता रहा है।
सम्मान ग्रहण करने के पश्चात अर्पित सर्वेश ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि प्रतापगढ़ की साहित्यिक संस्कृति, उत्तर प्रदेश की प्रतिभा, हिंदी भाषा और उन सभी पाठकों का सम्मान है जिन्होंने उनके लेखन को स्नेह और समर्थन दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे भविष्य में भी समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों पर आधारित साहित्य का सृजन करते रहेंगे।
यह सम्मान अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती साहित्य समिति द्वारा आयोजित भव्य अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह के दौरान प्रदान किया गया, जिसमें देश-विदेश से साहित्यकारों, संत-महात्माओं, समाजसेवियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में दुर्गेश त्रिपाठी (अंतरराष्ट्रीय राइफल शूटर), अंतर्राष्ट्रीय महामंडलेश्वर महादेव बाबा, डॉ. साध्वी गैबरियल (लंदन), सुप्रसिद्ध कवयित्री एवं गीतकार वंदना विशेष, कमोडोर (डॉ.) विजय शंकर बबेले, विश्व रिकॉर्ड धारक डॉ. अशोक पांडेय गुलशन, मंजुशा पवार, मीनू शर्मा तथा डॉ. निकेता सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. संजीव (सब इंस्पेक्टर–CISF) ने किया। आयोजन अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती साहित्य समिति की संस्थापक एवं अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आरती दूबे (शुक्ला) तथा अंतर्राष्ट्रीय सचिव एवं कोषाध्यक्ष डॉ. प्रिया ठाकुर के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
राजधानी लखनऊ में "अंतरराष्ट्रीय तेजस्वी सम्मान" से सम्मानित होकर अर्पित सर्वेश ने एक बार फिर सिद्ध किया कि प्रतिभा, समर्पण, निरंतर परिश्रम और सृजनशीलता के बल पर प्रतापगढ़ जैसे जनपदों की युवा प्रतिभाएँ राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकती हैं। यह उपलब्धि प्रतापगढ़ के प्रत्येक नागरिक और समूचे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व, प्रेरणा और सम्मान का प्रतीक है।
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