आईवीएफ जागरूकता शिविर में विशेषज्ञों ने दूर किए बांझपन से जुड़े भ्रम, 50 दंपत्तियों ने लिया परामर्श

दीपक श्रीवास्तव 
आईवीएफ जागरूकता शिविर में विशेषज्ञों ने दूर किए बांझपन से जुड़े भ्रम, 50 दंपत्तियों ने लिया परामर्श
जौनपुर। नगर के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित जीऐचके हॉस्पिटल में बांझपन (इन्फर्टिलिटी) जैसी गंभीर समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार को निशुल्क आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दंपत्तियों को आधुनिक उपचार पद्धति की जानकारी दी और लगभग 50 दंपत्तियों ने निशुल्क परामर्श का लाभ उठाया।
आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. दीपिका मिश्रा ने बताया कि आईवीएफ एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु का निषेचन शरीर के बाहर प्रयोगशाला में कराया जाता है। इसके बाद तैयार भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह तकनीक उन दंपत्तियों के लिए बेहद कारगर है, जो लंबे समय से संतान प्राप्ति का प्रयास कर रहे हैं लेकिन सफल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्यूब ब्लॉकेज, पुरुषों में कम शुक्राणु संख्या या अस्पष्टीकृत बांझपन जैसी स्थितियों में आईवीएफ प्रभावी विकल्प साबित होता है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि आईवीएफ की एक प्रक्रिया पूरी होने में सामान्यतः 15 से 20 दिन का समय लगता है। इसकी लागत अस्पताल और अपनाई गई तकनीक पर निर्भर करती है, लेकिन औसतन एक चक्र पर ₹1.5 लाख से ₹2.5 लाख तक का खर्च आता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई संस्थानों में सरकारी योजनाओं एवं अन्य सहायता के माध्यम से मरीजों को आर्थिक राहत भी दी जा रही है।
उन्होंने लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि आईवीएफ से जन्म लेने वाले बच्चे पूरी तरह सामान्य होते हैं। यह एक सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तकनीक है, इसलिए इसे लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी नहीं रखनी चाहिए।
इस अवसर पर डॉ. अम्बर खान ने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य केवल उपचार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और छोटे शहरों में आज भी आईवीएफ को लेकर कई तरह के भ्रम और डर मौजूद हैं। ऐसे जागरूकता शिविरों के माध्यम से लोगों को सही जानकारी देकर उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आईवीएफ के माध्यम से हजारों दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त हो चुका है और यह तकनीक लगातार सफल साबित हो रही है।

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