आठवीं मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस निकला, गूंजे नौहे और मातम की सदाएं

दीपक श्रीवास्तव 
आठवीं मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस निकला, गूंजे नौहे और मातम की सदाएं
जौनपुर, 25 जून। शिराज-ए-हिंद जौनपुर में गुरुवार को आठवीं मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस पारंपरिक श्रद्धा, अकीदत और गमगीन माहौल के बीच निकाला गया। मोहल्ला नसीब खां मंडी स्थित इमामबाड़ा नाजिम अली खां से अंजुमन हुसैनिया के नेतृत्व में निकले इस जुलूस में शहर की 20 से अधिक मातमी अंजुमनों ने हिस्सा लिया। नौहा-ख्वानी और सीना-जनी के माध्यम से कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया गया। नगर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजलिसों, जुलूसों तथा जुलजनाह, अलम और ताबूत के कार्यक्रम आयोजित हुए।
मजलिस को संबोधित करते हुए दिल्ली से आए विद्वान डॉ. कल्बे रजा नकवी ने कहा कि कर्बला का संदेश अन्याय, अत्याचार और आतंक के विरुद्ध संघर्ष का संदेश है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने सत्य और इंसानियत की रक्षा के लिए अपने परिवार सहित महान कुर्बानी दी। उन्होंने कर्बला के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए हजरत अब्बास की वफादारी, अली अकबर की शहादत, छह माह के अली असगर की कुर्बानी तथा जनाबे कासिम के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि मोहर्रम का संदेश इंसाफ, सब्र और मानवता की रक्षा के लिए संघर्ष करना है।
जुलूस में शबीहे अलम, जुलजनाह, गहवारा-ए-अली असगर और ताबूत बरामद किए गए। मातमी अंजुमनों द्वारा पढ़े गए नौहों और किए गए मातम से पूरा वातावरण शोकमय हो उठा। जुलूस अपने पारंपरिक मार्गों से होता हुआ अटाला मस्जिद स्थित इमामबाड़ा शेख अल्ताफ हुसैन पहुंचा, जहां तुर्बत को जुलजनाह और गहवारा-ए-अली असगर से मिलाया गया। इस भावुक दृश्य को देखकर बड़ी संख्या में मौजूद अजादारों की आंखें नम हो गईं।
इसके बाद जुलूस पुनः इमामबाड़ा नाजिम अली खां पहुंचकर संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन परवेज हसन ने किया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासनिक अधिकारियों एवं पुलिस बल की तैनाती रही। जुलूस में हजारों की संख्या में अजादारों ने भाग लेकर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।


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