दीपक श्रीवास्तव
जौनपुर-गाजीपुर के 70 %बीएड कॉलेजों में शिक्षक नहीं,शैक्षणिक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, प्रवेश-परीक्षा जारी
वीर बहादुर सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध जौनपुर और गाजीपुर के बीएड महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इन दोनों जिलों के लगभग 70 प्रतिशत बीएड कॉलेजों में वर्षों से अनुमोदित शिक्षक नहीं हैं, इसके बावजूद प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा और परिणाम जैसे सभी कार्य नियमित रूप से जारी हैं।
नियमों के मुताबिक, बीएड महाविद्यालयों में निर्धारित संख्या में योग्य और विश्वविद्यालय से अनुमोदित शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य है। हालांकि, बड़ी संख्या में संस्थानों में यह व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित है। आरोप है कि शिक्षकों के अनुमोदन का मामला कई वर्षों से लंबित है, लेकिन इस संबंध में न तो कोई प्रभावी जांच हुई है और न ही किसी संस्थान के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई है।
शिक्षाविदों का कहना है कि यदि महाविद्यालयों में अनुमोदित शिक्षक ही नहीं हैं, तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल रही है। यह भी सवाल उठता है कि जब निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा है, तो प्रवेश, परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया किस आधार पर संचालित की जा रही है। छात्र फीस भर रहे हैं, परीक्षाएं दे रहे हैं और डिग्रियां भी प्राप्त कर रहे हैं, जबकि शिक्षकों की कमी का मुद्दा वर्षों से अनसुलझा है।
इस स्थिति से पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां समय रहते सख्त कदम नहीं उठातीं, तो शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ बीएड प्रणाली की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ जाएगी।
इस गंभीर समस्या पर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि यह एक बड़ी समस्या है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन बीएड महाविद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं या जिनका अनुमोदन लंबित है, वे तत्काल नियमानुसार अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करें।
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