दीपक श्रीवास्तव
50 की उम्र में ही खराब हो रहे घुटने वक्त रहते करें बचाव, वरना ट्रांसप्लांट की आएगी नौबत-डा उत्तम सिंह
मोटापा को करें नियंत्रित, क्योंकि अधिक भार पड़ने की वजह से जोड़ समय से पहले खराब होने लगते हैं-डा उत्तम सिंह
जौनपुर लायन्स क्लब जौनपुर संगठन और एसएएस केयर इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आर्थराइटिस गठिया जोडों के दर्द और उसके समाधान विषय पर कार्यशाला, सिविल लाइन स्थित तड़का रेस्टोरेंट के हाल में आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में उपस्थित होकर लोगों ने लाभ उठाते हुए जागरूक हुए और जांच कराई व परामर्श लिया।
जिसमें मुख्य अतिथि वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ उत्तम सिंह ने आर्थराइटिस के कारण, लक्षण, बचाव , आधुनिक उपचार और जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि अब गठिया बुढ़ापे की बीमारी नहीं रही। कम उम्र के लोगों को भी गठिया घेर रही है। विशेषकर आजकल सीनियर सिटीजन्स में घुटने, कूल्हे और पीठ दर्द की समस्या सबसे ज्यादा कॉमन है। करीब 90 से 95% मामलों में सही ट्रीटमेंट मिल जाए, तो ट्रांसप्लांट की नौबत से बचा जा सकता है। हालांकि लोगों में इस बारे में जागरुकता की कमी है। वर्तमान में गलत लाइफस्टाइल, प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड का सेवन और पोषण की कमी से मिडिल और वृद्धावस्था में जोड़ों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अगर आर्थराइटिस को शुरुआती स्टेज में पहचानकर इलाज कराया जाए, तो दवाओं और एक्सरसाइज से राहत मिल सकती है। अगर आर्थराइटिस ग्रेड 4 में पहुंच जाए, तो घुटने का रिप्लेसमेंट जरूरी हो जाता है। इसी तरह कूल्हे का रिप्लेसमेंट अक्सर पुरानी चोटों या हालिया फ्रैक्चर के कारण जरूरी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि लोगों को 50 की उम्र के बाद हड्डी रोग विशेषज्ञ से समय-समय पर मिलकर जांच करानी चाहिए। हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। मुख्य रुप से मोटापा को नियंत्रित करें। क्योंकि शरीर का वज़न बढ़ने का सबसे ज्यादा असर जोड़ों पर पड़ता है। अधिक भार पड़ने की वजह से जोड़ समय से पहले खराब होने लगते हैं। जंक फूड से दूरी बनानी चाहिए और लाइफस्टाइल को बेहतर बनाना चाहिए। नियमित व्यायाम एवं जांच की मांसपेशियों की कसरत, फिजियोथेरेपी, नियमित योग आदि करें। और खुद को एक्टिव रखना चाहिए। अगर किसी तरह की समस्या हो, तो डॉक्टर से मिलें। सावधानी बरतने से हड्डियों की परेशानियों से बचा जा सकता है।
आगे डॉ उत्तम सिंह ने कहा कि आर्थराइटिस (गठिया) जोड़ों की सूजन और दर्द का मुख्य कारण है, जो कार्टिलेज (उपास्थि) को घिसने से शुरू होता है। जब दवाइयों या फिजियोथेरेपी से आराम नहीं मिलता, तो घुटने या कूल्हे का प्रत्यारोपण (जॉइंट रिप्लेसमेंट) एक स्थायी और प्रभावी समाधान होता है। आर्थराइटिस मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है जो घुटनों और कूल्हों को प्रभावित करता है। "ऑस्टियोआर्थराइटिस" यह सबसे आम है, जो उम्र के साथ कार्टिलेज घिसने के कारण होता है। "रूमेटॉइड आर्थराइटिस" यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जो जोड़ों के ऊतकों में सूजन पैदा करती है। आगे डा उत्तम ने बताया कि जब गठिया गंभीर हो जाता है और चलना-फिरना या दैनिक कार्य करना मुश्किल हो जाता है, तब प्रत्यारोपण की सलाह दी जाती हैं। इसमें क्षतिग्रस्त जोड़ की सतह को हटाकर धातु या उच्च गुणवत्ता वाले प्लास्टिक के कृत्रिम जोड़ (इम्प्लांट) लगाए जाते हैं।
यह सर्जरी अत्यधिक सफल है, जिससे दर्द से स्थायी राहत मिलती है और मरीज सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। उन्होंने बताया कि अब प्रत्यारोपण की व्यवस्था जौनपुर में शिव सहाय हास्पिटल में उपलब्ध है।
इस अवसर पर अतिथियों का स्वागत व संचालन डिप्टी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर सै मो मुस्तफा ने किया। रीजन चेयरपर्सन प्रतिमा गुप्ता, लायन्स मेन अध्यक्ष सीए राजेश राज गुप्ता, लायन्स गोमती अध्यक्ष डॉ राजेश मौर्य, लायन्स पवन अध्यक्ष डॉ सूरज जायसवाल व अविनाश मिश्रा ने डॉ उत्तम सिंह को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। आभार अंशुमान पाण्डेय ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर मनीष गुप्ता, योगेश साहू, नवीन मिश्रा, पवन जायसवाल, अजय गुप्ता, पदमाकर राय, शकील अहमद, सुनीता सिंह, ज्योति श्रीवास्तव, शशिकांत सिंह, आदि सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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