दीपक श्रीवास्तव/इन्द्रजीत सिंह मौर्य
बहराइच के बाद खेतासराय के गाजीमियां के मेले पर लगा प्रतिबंध
खेतासराय में 14 मई को प्रस्तावित था आक्रमणकारी सैयद सालार मसूद गाजी मियां का मेला
मेला क्षेत्र में पुलिस प्रशासन ने बैठाया पहरा, भागे-भागे फिर रहे मुजावर और दफाली
मुख्यमंत्री के कड़े तेवर के बाद हरकत में आए जौनपुर पुलिस प्रशासन
जौनपुर। यूपी के संभल और बहराइच में सालार मसूद गाजी मियां की याद में लगने वाले मेले पर प्रदेश शासन द्वारा कड़े प्रतिबंध लगा दिए जाने के बाद से जौनपुर पुलिस भी हरकत में आ गई है।
जिले के खेतासराय कस्बे में हजारों लोगों के बीच इसी 14 मई को लगने वाले गाजी मियां के इस मेले पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
मेला क्षेत्र में कोई झूला , सर्कस, चरखी, चिड़ियाघर, छोटे बड़े चलते फिरते अस्थाई शोरूम दुकानदार न आए इसके लिए खेतासराय पुलिस निरंतर 24 घंटे निगरानी कर रही है।
पुलिस कि सख्त पहरे के चलते मेला लगाने वाले मुजावर और दफाली उल्टे पैर भागे-भागे फिर रहे हैं। अंधविश्वास के नाम पर सीधे-साधे लोगों को बहला फुसलाकर हजारों का वारा न्यारा करने वाले ये तथाकथित मुजावर मेले को लेकर एकदम चुप्पी साथ लिए हैं।
बहराइच जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से जौनपुर जिला प्रशासन और एलआई यू के अधिकारी इस पूरे मामले में बेहद ही सक्रिय हो गए हैं।
अधिकारियों की टीम मेला लगवाने वाले मुजावर और दफाली की खोजबीन में जुट गए हैं। पुलिस के ख़ौफ के चलते वह न तो किसी प्रकार का बयान देना चाहते हैं। ना ही प्रशासन के सामने आने की हिम्मत जुटा रहे हैं।
सूबे की सियासत में सुर्खियों पर आए संभल जिले में सैयद सालार मसूद गाजी की याद में लगने वाले मेले पर पिछली बार से ही प्रदेश शासन ने रोक लगा दिया । पुलिस ने मेला आयोजित करने पर मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी भी दी है।
वहाँ के एएसपी ने कहा कि सालार मसूद गजनवी का सेनापति था, उसने लूटपाट और हत्याएं की थीं। इतिहास में इस बात का जिक्र है।
लिहाजा पुलिस ने नेजा मेला लगाए जाने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। कहा है कि जिस सैयद सालार मसूद गाजी की याद में यह आयोजन किया जाता है वह मोहम्मद गजनवी का सेनापति था। उसकी याद में यह मेला उचित नहीं है।
पूर्वी यूपी के सियासी पृष्ठभूमि में जनपद जौनपुर का अपना खास मुकाम है। सैयद सालार मसूद गाजी मियां का मेला इसी जिले के नगर पंचायत खेतासराय क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष गुरुवार के दिन लगता है।
इस बार 14 मई को यह मेला प्रस्तावित था।
मेले से सवा महीने पहले मेले की लगन रखी जाती है।
मेले का लगन रखने के लिए खेतासराय के शुकरुल्ला दफाली, मोछू दफाली अपनी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हैं लेकिन इस बार गांव-गांव में खुले तौर पर प्रचार नहीं हुआ।
फिलहाल चोरी छुपे गाजी मियां के निशान को लगाने का कार्य भी यह दफाली और उनके चेले चपाटे कर रहे हैं।
बुधवार को प्रतिनिधि ने मेला लगाए जाने के संबंध में उनसे जब बात की तो उन्होंने कहा कि जब प्रदेश सरकार मेला लगाने की अनुमति नहीं दे रही है।
तो हम भी इस बार किसी प्रकार किसी प्रकार का रिस्क नही लेंगे। दबी जुबान स्वीकार किया कि इस बार मेला नहीं लगेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर मेला क्षेत्र में कोई बाहर से पूजा पाठ फ़ातिया कराने के लिए आता है तो हम कैसे रोक सकते हैं।
वैसे गाजी मियां के इस मेले को हिंदू संप्रदाय के लोग राष्ट्रवीर सुहेलदेव विजय दिवस के रूप में मानते हैं।
उनका कहना है कि सैयद सालार मसूद गाजी से बहराइच जिले में जब 21 छोटे राज्यों के राजाओं के साथ हुई जंग में वह मारा गया तो उस दिन को हम लोग विजय दिवस के रूप में मनाते हैं।
मेले के नाम पर मुजावर करते हैं वसूली
खेतासराय में लगने वाले मेले में गाजी मियां की कनूरी कराने के लिए जो भी स्त्री पुरुष बूढ़े बच्चे आते हैं उनसे मिलने वाली रकम और चढ़ावे के रूप में अनाज, मुर्गा , मलीदा, नकदी व अन्य जो भी सामान मिलता है। मुजावर और दफाली उसे अपने घर लेकर चले जाते हैं।
खेतासराय के फिरोज जोगी, अलाऊदीन जोगी, उजागिर जोगी, शुकरुल्लाह दफाली, मोछू दफाली खुद स्वीकार करते हैं कि गाजी मियां के मेले से अच्छी खासी आए हो जाती है। गेहूं अनाज व अन्य सामानों को हम लोग बेंच देते हैं। फिर बहराइच में जो कोई जाता है तो कुछ चंद रुपए चढ़ावे के नाम पर भेज देते हैं।
गाजी मियां के नाम पर पूजा पाठ यानी कनूरी करने के लिए लकड़ी के बनाए गए निशान पर 500, 200 से लेकर हजारों रुपये की मन्नत को कपड़े में लपेटकर बांधा जाता है।
फिर मिट्टी के बर्तन में चने की दाल, बैगन, चावल और बाटी को बनाकर पहले उन्हें चढ़ाया जाता है।मुर्गा व अन्य जंतुओं की बलि भी दी जाती है।
मेले पर लगा कड़ा प्रतिबंध, नहीं लगेगा मेला
जौनपुर जिला मजिस्ट्रेट सैमुअल एन पाल ने शाहगंज तहसील प्रशासन को शासन की गाइडलाइन से अवगत कराते हुए निर्देशित कर दिया है कि खेतासराय में सैयद सालार मसूद गाजी मियां का कोई भी मेला जो इसी 14 मई को लगना था। उस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस बार आक्रमणकारी गाजी मियां का मेला खेतासराय में नहीं लगेगा। इसके लिए खेतासराय थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह , कस्बा प्रभारी अनिल कुमार पाठक , तारीक अंसारी, उप निरीक्षक संजय पांडेय, कांस्टेबल आशुतोष तिवारी, अंबिका यादव, अभिमन्यु सिंह भारी संख्या में महिला पुलिस बल के साथ प्रत्येक दिन खुद निगरानी कर रहे हैं।
वही इस मामले में शाहगंज के डिप्टी एसपी गिरेन्द्र सिंह
ने बताया कि शासन का सख्त निर्देश है कि सुरक्षा के मद्देनजर देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी बढ़ गई है। पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मूड में है। लिहाजा सैयद सालार मसूद गाजी मियां का मेला इस बार नहीं लगेगा।
बिना अनुमति के कोई भी मुजावर या अन्य कोई मेला लगाने वाले कमेटी और संस्था के लोग बिना अनुमति के कोई भी कार्य करेंगे तो उन्हें जेल भेजा जाएगा।
इस मेले में पूर्वांचल के विभिन्न अंचलों से हजारों की संख्या में लोग शामिल होने आते हैं। इसे सैयद सालार मसूद गाजी मियां का मेला अथवा गुरखेत का मेला भी कहा जाता है ।
मेला क्षेत्र में अब काफी रिहायशी मकान, आबादी हो जाने से जगह कम है लिहाजा मेला खेतासराय से शुरू होकर गोरारी बाजार तक तीन किलोमीटर के दायरे में रहता है।
मेला शुरू होने से डेढ़ महीना पहले ही चिड़ियाघर, झूला, सर्कस, चरखी के साथ तरबूज, खरबूज और मिठाई के बड़े दुकानदार यहां आते हैं । वह लोग दो महीना पहले ही अपने लिए जमीन की बुकिंग कर लेते हैं।
इस बार संभल में उठे विवाद और प्रदेश सरकार के सख्त रवैया के चलते जौनपुर जिला प्रशासन ने भी मेला लगाने की अनुमति नहीं दी।
इसके चलते पहले से ही कोई बुकिंग नहीं ली गई थी।
कुछ छोटे-मोटे दुकान दार भूल वश यहां आ गए थे। उन्हें पुलिस प्रशासन ने अच्छे से समझा दिया कि मेला लगने की अनुमति नहीं है। लिहाजा वह लोग भी अपना डेरा तंबू उठा कर चले गए।
कौन था सैयद सालार मसूद गाजी
जौनपुर। इतिहास की किताबों में हुए जिक्र के मुताबिक
सैयद सालार मसूद गाजी लुटेरा और आक्रांता मोहम्मद गजनवी का भांजा था। मोहम्मद गजनबी ने मसूद गाजी को अपनी सेना की कमान सौंप रखी थी। हिंदू मंदिरों पर किए जा रहे आए दिन हमले लूटपाट में उसकी आक्रांता को देखते हुए उसे अपनी सेना का सेनापति भी बनाया था।
अगर सबसे क्रूर शासको की बात आती है तो उसमें सबसे पहला नाम मोहम्मद गजनवी का नाम आता है।
वह गजनी का रहने वाला था उसने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर हमला करके भारी लूटपाट करते हुए शिवलिंग को खंडिंत कर दिया था। मंदिर को भी काफी क्षतिग्रस्त कर दिया।
बहराइच में हुए भीषण युद्ध में महाराजा सुहेलदेव राजभर की सेना ने सालार मसूद गाजी को करारी शिकस्त दी। हार के साथ ही युद्ध में सालार मसूद गाजी को जान भी गंवानी पड़ी। इसके बाद उसकी सेना ने बहराइच में ही उसको दफना दिया। काफी समय के बाद दिल्ली के सुल्तानों के दौर में यहां मजार बनी और इसे दरगाह के रूप दे दिया गया।
महाराजा सुहेलदेव श्रावस्ती के एक महान राजा थे , जिन्हें 1034 में बहराइच में गजनवी सेनापति गाजी मियां को हराने और मारने के लिए जाना जाता है।
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