दीपक श्रीवास्तव/सीपी दुबे
मंगेश यादव एनकाउंटर मामले में जिला जज की अदालत में निगरानी स्वीकार, विपक्षियों को नोटिस
जौनपुर। बक्शा थाना क्षेत्र से जुड़े मंगेश यादव एनकाउंटर मामले में जिला जज सुशील कुमार शशि की अदालत ने मृतक की मां द्वारा दाखिल निगरानी याचिका को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने मामले में विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई के लिए 8 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है।
मामले के अनुसार मृतक मंगेश यादव की मां शीला देवी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) जौनपुर की अदालत में वाद दाखिल किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि 2 सितंबर 2024 को दोपहर करीब दो बजे चार-पांच पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और उनके बेटे मंगेश यादव को पूछताछ के नाम पर अपने साथ ले गए। बाद में उसे डकैती के एक मामले में आरोपी बताते हुए फर्जी मुठभेड़ दिखाकर मार दिया गया।
सीजेएम अदालत ने एसडीएम विदुषी सिंह और एसटीएफ द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के आधार पर यह पाया कि मंगेश यादव की मृत्यु पुलिस मुठभेड़ में हुई थी। अदालत ने यह भी कहा कि मृतक की मां और बहन की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे हत्या की पुष्टि हो सके। इस आधार पर अदालत ने वाद को निरस्त कर दिया था।
सीजेएम कोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ शीला देवी ने जिला जज की अदालत में अधिवक्ता समर बहादुर यादव और ऋषि यादव के माध्यम से निगरानी याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया है कि अधीनस्थ न्यायालय ने प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की अनदेखी करते हुए त्रुटिपूर्ण आदेश पारित किया है और केवल पुलिस तथा एसडीएम की जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया गया।
याचिका में उत्तर प्रदेश राज्य, जिलाधिकारी के माध्यम से, एसटीएफ प्रभारी डीके शाही व उनकी टीम सुल्तानपुर, तत्कालीन थानाध्यक्ष कोतवाली सुल्तानपुर, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर तथा थाना बक्शा पुलिस को विपक्षी बनाया गया है।
शीला देवी ने 23 फरवरी 2026 के अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को निरस्त कर मामले की पुनः सुनवाई करते हुए न्यायोचित आदेश पारित करने की मांग की है। जिला जज की अदालत ने निगरानी स्वीकार करते हुए सभी विपक्षियों को नोटिस जारी कर 8 अप्रैल को अगली सुनवाई की तिथि तय की है।
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