जिलाधिकारी वाराणसी का वेतन रोकने का कमिश्नर को आदेश,डीजीपी से जवाब तलब


दीपक श्रीवास्तव/हिमांशु श्रीवास्तव एडवोकेट 
जिलाधिकारी वाराणसी का वेतन रोकने का कमिश्नर को आदेश,डीजीपी से जवाब तलब 
मामला पुलिस वैन से दुर्घटना के मामले में डीआईजी व एसएसपी से क्षतिपूर्ति की धनराशि की वसूली न करने का

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी अनुपालन न होने पर कोर्ट सख्त,अगली सुनवाई 27 मार्च को

जौनपुर -पुलिस वैन से 16 वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में मोटरसाइकिल चालक की मौत के मामले में कोर्ट के आदेश के बावजूद डीआईजी व एसएसपी वाराणसी से क्षतिपूर्ति की धनराशि की वसूली डीएम वाराणसी द्वारा नहीं की गई। जिस पर ट्रिब्यूनल  के न्यायाधीश मनोज कुमार अग्रवाल ने कमिश्नर वाराणसी को आदेश दिया कि जिलाधिकारी वाराणसी द्वारा की गई अवहेलना के संबंध में विधिक कार्रवाई करते हुए उनका आधा वेतन रोक दिया जाय।साथ ही कोर्ट ने डीजीपी लखनऊ को आदेश दिया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद अभी तक आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। इसलिए वह अगली तिथि 27 मार्च को अपना स्पष्टीकरण कोर्ट में प्रस्तुत करें कि किन कारणों से डीआईजी व एसएसपी वाराणसी से धनराशि की वसूली नहीं की गई।

बता दें कि 14 जून 2010 को चंदवक बाजार से से घर जाते समय 8:00 बजे सुबह गोमती नदी पुल के पास पुलिस की वैन के चालक राम सिंह की तेजी व लापरवाही से वैन चलाने के कारण मोटरसाइकिल चालक श्रवण कुमार निवासी बलुआ,चंदवक की दुर्घटना में मृत्यु हो गई।वह मोबाइल रिपेयरिंग एवं वीडियोग्राफी का कार्य करता था। मृतक के पिता अशोक ,माता व पत्नी ने पुलिस वैन के रजिस्टर्ड स्वामी डीआईजी व एसएसपी वाराणसी के अलावा चालक राम सिंह व उत्तर प्रदेश सरकार जरिए जिलाधिकारी के खिलाफ क्षतिपूर्ति का दावा दाखिल किया। कोर्ट ने 12 नवंबर 2013 को विपक्षी गण को आदेश दिया कि मृतक के परिजनों को 3,93,000 रुपए क्षतिपूर्ति याचिका प्रस्तुत करने की तिथि से 7 प्रतिशत ब्याज के साथ एक माह के भीतर प्रदान करें। आदेश के अनुपालन न होने पर मृतक के पिता अशोक ने डीआईजी व एसएसपी के खिलाफ धनराशि की वसूली के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया कि जरिए जिला अधिकारी वाराणसी आरसी जारी की जाए। कोर्ट ने आरसी जारी किया। हाईकोर्ट ने भी मामले के निस्तारण का आदेश दिया है लेकिन जिलाधिकारी वाराणसी द्वारा आदेश का पालन नहीं किया गया।कोर्ट ने जिलाधिकारी वाराणसी से स्पष्टीकरण भी मांगा तथा डीजीपी लखनऊ को पत्र भी लिखा लेकिन अनुपालन नहीं हुआ। तब कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।

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