जौनपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमीमरीज प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर, जांच किट भी गायब

दीपक श्रीवास्तव 
जौनपुर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
मरीज प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर, जांच किट भी गायब

जौनपुर के अमर शहीद उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर प्रदेश सरकार के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, क्योंकि सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आवश्यक जांचों का अभाव है।

जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट, अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ, नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ, चेस्ट रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, किडनी और लीवर रोग विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। इस कमी के कारण मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
पैथोलॉजी विभाग में भी जांचों के लिए पर्याप्त किट उपलब्ध नहीं हैं। लगभग एक महीने से रीजन टेस्ट किट अस्पताल में मौजूद नहीं है, जिससे कई महत्वपूर्ण जांचें नहीं हो पा रही हैं। इसके अतिरिक्त, महंगी दवाएं और कुछ विशेष चिकित्सा सुविधाएं भी जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं।

इन कमियों के चलते गरीब जनता को मजबूरी में मल्टी-स्पेशलिस्ट निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। आरोप है कि निजी डॉक्टर मरीजों का जमकर शोषण करते हैं, और कई बार मरीज मौत के मुंह में भी चले जाते हैं। यदि ये सुविधाएं जिला अस्पताल में होतीं, तो शायद मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाता।
जनपद के जनप्रतिनिधि लगातार जिला चिकित्सालय का भ्रमण करते हैं, लेकिन इन गंभीर कमियों पर उनकी नजर नहीं पड़ती। वे अक्सर फीता काटकर या फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरते रहते हैं। सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा किया जाता है, लेकिन जौनपुर के इस अस्पताल में इसका कोई असर दिखाई नहीं देता।

अस्पताल से मरीजों को निजी मल्टी-स्पेशलिस्ट अस्पतालों में रेफर कर मोटा कमीशन वसूलने का धंधा बदस्तूर जारी है। पूर्व में बदलापुर के विधायक रमेश चंद्र मिश्रा ने इस पर कड़ी पहल करते हुए एक नामी ग्रामीण अस्पताल को सील भी कराया था, लेकिन इसके बावजूद यह प्रथा जारी है।

जौनपुर अमर शहीद उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ संजय कन्नौजिया ने बताया कि चिकित्सकों की कमी के लिया शासन को पत्र लिखा गया है।जांच की मशीनों को सही कराया जा रहा है दवाये पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।शासन द्वारा जो भी दवाएं है वो उपलब्ध है मरीजों को बेहतर उपचार सुविधा देने के लिय प्रयास किया जा रहा है।

अब यह देखना होगा कि सरकार द्वारा किए जा रहे स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई कब और कैसे पटेगी।

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